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रूनी ने कप्तान होने की कठिनाइयों के बारे में बताया

June 08th, 2020 17:34 IST
रूनी ने कप्तान होने की कठिनाइयों के बारे में बताया

हाईलाइट

  • रूनी ने कप्तान होने की कठिनाइयों के बारे में बताया

डिजिटल डेस्क, लंदन। इंग्लिश फुटबाल क्लब मैनचेस्टर युनाइटेड और इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले पूर्व कप्तान वायने रूनी ने जोर देकर कहा है कि एक कप्तान का काम न केवल मैदान पर टीम का नेतृत्व करना है, बल्कि मैदान के बाहर भी अपने खिलाड़ियों की मदद करना है। उन्होंने कप्तान होने की कठिनाइयों के बारे में भी बात की। रूनी ने कहा कि कप्तान होने के नाते खिलाड़ी आपकी ओर देखते हैं और आपसे उम्मीद करते हैं कि आप कठिन परिस्थितियों में उनकी आवाज को आगे बढ़ाएंगे और कभी-कभी यह खुद कप्तान के लिए भी समस्याएं पैदा करता है।

रूनी ने द टाइम्स से कहा, जब खिलाड़ी खुश नहीं होते हैं तो वे आमतौर पर कप्तान के पास जाते हैं और आप वह व्यक्ति होते हैं, जिसके पास शिकायतें को पेश किया जाता है जोकि मुश्किल बातचीत हो सकती है। उन्होंने कहा, एक क्लब में मुझे यह बताया गया कि मैनेजर अपने प्रशिक्षण सत्रों को पर्याप्त नहीं थे। यह एक आसान नहीं है। माफ कीजिए। यह बहुत कुछ हो सकता है। आप टीम के चैरिटी कार्य और व्यावसायिक गतिविधियों की बैठकों में खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप पीएफए से बात करते हैं। कोविड-19 दौरान, कप्तानों को किसी भी चीज की आवश्यकता होती है, जो उनके खिलाड़ियों के लिए होनी चाहिए।

रूनी अपने फुटबाल करियर में बड़े क्ल्बों का नेतृत्व कर चुके हैं। इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और उनके लिए खेलते हुए उन्होंने 53 गोल किए हैं। इसके अलावा वह मैनचेस्टर यूनाइटेड, एवर्टन, डीसी यूनाइटेड और अब डर्बी कांउटी में हैं।

रूनी 2014 में इंग्लैंड टीम का कप्तान बने थे। उन्होंने कहा, अपने देश की कप्तानी करना सम्मान की बात है, लेकिन एक क्लब के लिए कप्तानी करना अलग और चुनौतीपूर्ण है। आप हमेशा अपने खिलाड़ियों के साथ नहीं होते हैं। आप पर जिम्मेदारी होती है कि टीम में आने वाले नए खिलाड़ियों का आप स्वागत करें और टीम के साथ घुलने-मिलने में उनकी मदद करें। मीडिया के सामने भी अपनी जिम्मेदारी निभाना पड़ता है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।