- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- पीएमजीएसवाई की 5000 किमी सड़कें...
MP News: पीएमजीएसवाई की 5000 किमी सड़कें भारी वाहनों से हो गई खराब, 3000 करोड़ का नुकसान

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के तहत मप्र में बनने वाली करीब 5000 किमी की सड़कें समय से पहले ही खराब हो चुकी हैं। यानी 3000 करोड़ रुपए से बनी लगभग 1150 सड़कें अपना गारंटी पीरियड भी पूरा नहीं कर सकीं। पीएमजीएसवाई की सड़कें खराब होने की वजह ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही माइनिंग की गतिविधियां, व्यापार और अन्य विभागों की चल रही योजनाओं में उपयोग होने वाले भारी वाहन हैं। माइनिंग के कारण सबसे ज्यादा पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़कें खराब हुई है। जानकारी के मुताबिक करीब 3000 किमी की 600 ऐसी सड़कें हैं जो माइनिंग में चल रहे भारी वाहनों (डंपर, हाईवा, बड़े मालवाहक ट्रक) के कारण खराब हुई हैं। यानी लगभग 1800 करोड़ रुपए से बनीं सड़कों को माइनिंग के कारण नुकसान हुआ। वहीं अन्य विभाग और गतिविधियों के संचालन के लिए चल रहे भारी वाहनों ने भी सड़कों को प्रभावित किया। अन्य विभागों की योजनाओं में चल रहे भारी वाहनों से करीब 550 सड़कें खराब हुई हैं। जो कि करीब 2000 किमी हैं। इन सड़कों के निर्माण में करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि निर्माण में उपयोग होने वाले मटेरियल के लिए भारी वाहन इन्हीं सड़कों से गुजरते हैं। जिसकी वजह से सड़कें प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से इन सड़कों पर भारी वाहनों का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण या तो सड़कें उखड़ गईं या फिर प्रभावित हुई हैं। आपको बता दें एक किलोमीटर की नई सड़क बनाने में करीब 60-70 लाख रुपए खर्च होते हैं। वहीं खराब हुई सड़कों के उन्नयन के लिए 30-35 लाख का खर्च आता है।
यह भी पढ़े -सोसायटी, ट्रस्ट एवं कंपनी के निजी हाई एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूल को अब 5 साल के लिये मान्यता मिलेगी
भारी वाहन पहुंचा रहे नुकसान
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़क ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूती देने के लिए बनाई गई हैं। लेकिन इसमें भारी वाहन और ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही माइनिंग के साथ अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और अन्य गतिविधियों से सड़कें दम तोड़ रहीं। ज्यादा वाहनों की आवाजाही पीएमजीएसवाई की सड़कों को नुकसान पहुंचा रहीं। भारी वाहनों का भार सड़कें नहीं झेल पा रहीं। सड़कों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधा के लिए बनाया गया है।
नहीं है कोई पॉलिसी
विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत चल रहे भारी वाहनों से खराब हुईं सड़कों के मेंटेनेंस या उन्नयन के लिए विभाग जिम्मेदारी नहीं लेते। जिसके चलते ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण में फिर से करोड़ों का खर्च आता है। सड़कों के उन्नयन के लिए फिर टेंडर प्रक्रिया करना और विभागों की योजनाओं के पूरा होने का इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए अब तक कोई पॉलिसी भी नहीं बनाई गई है।
यह भी पढ़े -मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में बड़ा हादसा, तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर, 11 साल के बच्चे की मौत
ग्रामीणों को परेशानी
सड़कों के खराब होने से ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सड़कों का उद्देश्य भी अधूरा है। ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अच्छी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा। जहां ग्रामीणों को सड़कों की वजह से सुविधा मिलनी चाहिए वहां भारी वाहन ग्रामीणों की परेशानी को बढ़ा रहे।
Created On :   6 Aug 2026 12:44 AM IST












