MP News: एनएबीएच के विरोध में उतरे प्राइवेट हॉस्पिटल, कहा इसे स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रखा जाए

एनएबीएच के विरोध में उतरे प्राइवेट हॉस्पिटल, कहा इसे स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रखा जाए
  • नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) हटाने और स्वैच्छिक करने की मांग को लेकर प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के बैनर तले बुधवार को प्राइवेट हास्पिटल के डॉक्टरों ने भोपाल के आयुष्मान कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) हटाने और स्वैच्छिक करने की मांग को लेकर प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के बैनर तले बुधवार को प्राइवेट हास्पिटल के डॉक्टरों ने भोपाल के आयुष्मान कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। संगठन का कहना है कि लगातार आपत्तियां, ज्ञापन और बातचीत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने एनएबीएच की शर्त को नहीं हटाया है। संगठन के डॉ विशाल बघेल का कहना है कि वे गुणवत्ता मानकों के विरोधी नहीं हैं। लेकिन एनएबीएच को स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रखा जाना चाहिए।

अस्पताल के आकार, बेड संख्या, उपलब्ध संसाधनों और क्षेत्र के अनुसार व्यावहारिक गुणवत्ता मानक निर्धारित किए जाने चाहिए। एनएबीएच के लिए अस्पतालों को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी। यह भार अस्पताल पर आएगा। हर तीसरे महीने ऑडिट की तैयारी करनी पड़ेगी। ऐसे में जो समय मरीजों के इलाज में देना चाहिए वो ऑडिट और उसकी तैयारियों में जाएगा। एनएबीएच अस्पताल में मौजूदा व्यवस्था, स्टॉफ, उनकी क्वालिटी, संख्या, लैब आदि सुविधाओं को लेकर रेटिंग देगा। इसके बाद अस्पताल को सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। बुनियादी सुविधाएं होने पर ही यह मिलेगा। ऐसा होने पर कई मध्यम और छोटे अस्पताल दायरे से बाहर हो सकते हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि कि यदि प्रदेश के छोटे एवं मध्यम अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर होते हैं तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव उन गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर पड़ेगा जो अपने घर के नजदीक निजी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज कराते हैं। अगर बड़ी संख्या में अस्पताल डी-एंपैनल होते हैं तो इन अस्पतालों में इलाज करा रहे और भविष्य में आने वाले आयुष्मान मरीजों का भार आखिर कौन उठाएगा।

अस्पताल संगठनों ने मांग की है कि किसी भी बड़े पैमाने की डी-इम्पैनलमेंट कार्रवाई से पहले राज्य सरकार हस्तक्षेप करे। संगठन का कहना है कि कार्रवाई होने पर प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। आज भोपाल के हॉस्पिटल शामिल हुए हैं आगे आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य हॉस्पिटल भी शामिल होंगे। संगठन ने ये भी कहा कि आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली राशि समय पर नहीं दी जाती। कई हॉस्पिटल की आयुष्मान योजना की राशि 2021 से पेंडिंग है। राशि पेंडिंग होने से वे अस्पताल के खर्च को पूरा नहीं कर पाते। मेडिकल सहित अन्य व्यवस्था बिगड़ती है।

Created On :   2 Oct 2026 12:02 AM IST

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