MP News: उज्जैन और गुजरात में शराबबंदी है तो कैसे हुई शराब की तस्करी, कांग्रेस ने आबकारी कार्यालय घेरा

उज्जैन और गुजरात में शराबबंदी है तो कैसे हुई शराब की तस्करी, कांग्रेस ने आबकारी कार्यालय घेरा
गुजरात में मप्र की जहरीली शराब से हुई 9 मौतों के बाद गुरुवार को उज्जैन में कांग्रेस ने उज्जैन आबकारी कार्यालय का घेराव किया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। गुजरात में मप्र की जहरीली शराब से हुई 9 मौतों के बाद गुरुवार को उज्जैन में कांग्रेस ने उज्जैन आबकारी कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस ने प्रदर्शन किया और सवाल उठाया कि मप्र शासन ने अप्रैल 2025 से उज्जैन सहित मप्र के 19 धार्मिक शहरों में शराबबंदी कर रखी है। गुजरात राज्य में भी सालों से शराबबंदी लागू है। ऐसे जिस शहर (उज्जैन) से शराबबंदी वाले राज्य गुजरात तक जहरीली शराब कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन सी ताकते हैं?। आबकारी कार्यालय, उज्जैन में लगभग दो घंटे चले हंगामे, नारेबाजी के बीच कांग्रेस ने जांच की मांग की। कहा कि शराब के उत्पादन से बिक्री तक की ट्रैकिंग होने के बावजूद गुजरात के भावनगर तक शराब कैसे पहुंची, जिसे पीने से गुजरात में 9 लोगों की मौत हो गई। कांग्रेस की मांगों और हंगामें के बाद आबकारी अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया और पांच दिन में जांच रिपोर्ट का भरोसा भी िदलाया। गुजरात के भावनगर में कथित जहरीली शराब को लेकर तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उज्जैन जिला आबकारी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान रघुपति राघव राजा राम की धुन गाते हुए शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आबकारी अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद कांग्रेस ने धरना खत्म कर दिया।

विधायक परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह नगर से शराब की जहरीली तस्करी हो रही है, जिससे लोगों की मौतें हो रही। मौतों पर मुख्यमंत्री मौन क्यों है, उन्हें जवाब देना चाहिए। परमार ने कहा कि सवाल सिर्फ गुजरात में हुई मौतों का नहीं है, बल्कि उस पूरे तंत्र का है जिसके जरिए शराब उत्पादन से लेकर उसकी बिक्री तक निगरानी और ट्रैकिंग होने के बावजूद तस्करी हो रही और लोग मर रहे। उज्जैन में कहां से ऐसी शराब आई, किसने गुजरात भेजी, किस वाहन से रवाना हुई, रास्ते में किन स्थानों से गुजरी और गुजरात में इसे किस नेटवर्क ने हासिल किया। इसमें उज्जैन के जो लोग शामिल है, उन्हें किसका अाश्रय है। परमार ने कहा कि प्रदेश में पनीर, दूध, मावा, दवाइयां, पानी तो जहरीले है ही अब शराब भी जहरीली दूसरे प्रदेशों में तस्करी की जाने लगी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चलाया था, लेकिन आज नकली और मिलावटी सामग्री के खिलाफ ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।

कांग्रेस ने प्रश्न खड़े किए कि शराब की आपूर्ति और बिक्री पर आबकारी विभाग की निगरानी है तो खेप विभाग की नजर से कैसे निकल गई। कांग्रेस ने जांच में विशेष रूप से सप्लाई चेन, वाहन, परमिट/दस्तावेज, स्रोत, रिसीवर, भुगतान और स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल करने की मांग की है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी ने राज्य सरकार से सवाल किया क्या उज्जैन में अवैध रूप से शराब की बिक्री के ऐसे ठिकाने मौजूद हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री के कथित ठिकानों की तत्काल जांच करवाई जाए। कांग्रेस ने साथ ही मालवा-निमाड़ की कुछ डिस्टलरियों से कथित अवैध सप्लाई, गुजरात में शराब पहुंचाने के लिए सीमावर्ती जिलों में ऊंचे मूल्य पर लिए जाने वाले शराब ठेकों और धार-अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों की बिक्री एवं आपूर्ति के पैटर्न की भी जांच की मांग की।

उज्जैन में पहले भी सामने आए जहरीली शराब के केस

सवाल उठाया कि अंतरराज्यीय स्तर पर शराब की तस्करी केवल स्थानीय स्तर के कुछ लोगों के बूते संभव नहीं हो सकती। इसलिए जांच केवल शराब की पेटियां जब्त करने या कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि उज्जैन में पहले भी जहरीली शराब के मामले सामने आए। वर्ष 2020 के जहरीली शराब प्रकरण में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद एसआईटी जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।

Created On :   22 Aug 2026 12:11 AM IST

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