दैनिक भास्कर हिंदी: केजरीवाल सरकार ने जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की मांग की थी, ऑडिट पैनल की रिपोर्ट

June 25th, 2021

हाईलाइट

  • ऑडिट पैनल की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आई जानकारी
  • दिल्ली राज्य सरकार ने 4 गुना तक अधिक मांगी थीऑक्सीजन
  • करीब 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हुई थी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर से मचे कोहारम के दौरान ऑक्सीजन संकट पैदा हुआ था। इन हालातों को शायद ही कोई भुला पाएगा। इस स्थिति में कई राज्यों ने ऑक्सीजन मांग रखी थी। ऑक्सीजन संकट की इस भयाभय स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक टास्क फोर्स बनाई थी। अब इसकी शुरुआती रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली ने अपनी ऑक्सीजन जरूरत को बढ़ा-चढ़ा कर बताया। 

ऑडिट पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली राज्य सरकार की ओर से 25 अप्रैल से 10 मई के बीच ऑक्सीजन की जो मांग रखी, वह वास्तविक आवश्यकता से 4 गुना तक अधिक हो सकती है। इससे दूसरे राज्यों की ऑक्सीजन आपूर्ति पर बुरा असर पड़ सकता था।

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रिपोर्ट में क​हा गया है कि, कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन संकट के दौरान जब दिल्ली सरकार द्वारा 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग रखी गई थी। उस दौरान दिल्ली को सिर्फ 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी। यानी कि राज्य सरकार ने करीब 4 गुना अधिक मांग की। 

ऑडिट पैनल की रिपोर्ट के आने के बाद केजरीवाल सरकार कई सवालों के घेरे में आ गई है। रिपोर्ट की मानें तो, दिल्ली राज्य सरकार द्वारा की गई 4 गुना अधिक मांग के कारण करीब 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हुई थी। क्योंकि उस समय मांग के अनुसार ऑक्सीजन की अतिरिक्त सप्लाई दिल्ली में की जा रही थी। 

ऑक्सीजन टास्क फोर्स के अनुसार, 29 अप्रैल से 10 मई के बीच कुछ अस्पतालों में डाटा ठीक किया गया। दिल्ली सरकार ने इस दौरान 1140 MT ऑक्सीजन की जरूरत बताई थी, जबकि करेक्शन के बाद ये डाटा 209 एमटी पहुंचा।

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कमेटी में कौन शामिल
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में ऑक्सीजन संकट को देखते हुए कई अस्पतालों ने हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। इन अस्पतालों द्वारा उस समय तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने की अपील की गई थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने 12 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया था। इस कमेटी से ऑक्सीजन वितरण, जरूरत और सप्लाई पर ऑडिट रिपोर्ट तलब की थी। इस टास्क फोर्स में दो सरकारी अधिकारी और देश के 10 जाने माने डॉक्टर्स भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस टास्क फोर्स को 6 महीने का समय दिया गया था।