रक्षामंत्री के लद्दाख दौरे का दूसरा दिन, राजनाथ बोले- जिसने भी आंख दिखाने की कोशिश की उसको मुंह तोड़ जवाब दिया

रक्षामंत्री के लद्दाख दौरे का दूसरा दिन, राजनाथ बोले- जिसने भी आंख दिखाने की कोशिश की उसको मुंह तोड़ जवाब दिया

Bhaskar Hindi
Update: 2021-06-28 16:08 GMT
रक्षामंत्री के लद्दाख दौरे का दूसरा दिन, राजनाथ बोले- जिसने भी आंख दिखाने की कोशिश की उसको मुंह तोड़ जवाब दिया
हाईलाइट
  • रक्षा मंत्री ने जवानों से मुलाकात कर उनके साथ नारा लगाया
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय लद्दाख दौरा
  • राजनाथ सिंह लेह में एयरफोर्स और मिलिट्री स्टेशन पहुंचे

डिजिटल डेस्क, लेह। तीन दिवसीय दौरे के लिए लद्दाख पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दूसरे दिन सोमवार को लेह में एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। यहां उन्होंने वायुसेना के जवानों से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने लद्दाख के कारू मिलिट्री स्टेशन का दौरा किया। रक्षा मंत्री ने जवानों से मुलाकात कर उनके साथ नारा लगाया। राजनाथ जवानों के साथ वाहे गुरुजी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह का नारा लगाते दिखे। रक्षा मंत्री ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के बनाए 63 प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन भी किया। इसके अलावा रक्षा मंत्री शाम को ठिकसे मठ पुहंचे। यहां उन्होंने शेषरब स्काईड त्साल लिंग लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।

4. ठिकसे मठ में रक्षामंत्री ने क्या कहा?
रक्षामंत्री ने कहा, मैं एक जगह बोल रहा था कि वो सैंकड़ों वर्षों से हमारा पड़ोसी देश है और सैंकड़ों वर्षों तक पड़ोसी रहेगा। क्या एक दूसरे पर गोली चलाकर समस्या का समाधान हो सकता है? क्या मिल-बैठकर बातचीत के द्वारा समाधान नहीं निकल सकता? मुझे विश्वास है कि कभी ना कभी सद्बुद्धि आएगी। रक्षामंत्री ने कहा, भारत दुनिया का अकेला देश है जिसने दुनिया के किसी देश पर ना तो कभी आक्रमण किया, ना एक इंच जमीन पर कभी कब्जा किया। भारत ने कभी दुनिया के किसी देश को आंख नहीं दिखाई लेकिन किसी का हमें आंख दिखाना भी किसी सूरत में मंजूर नहीं है। हम समस्या का समाधान चाहते हैं। 

3. एयरफोर्स स्टेशन में रक्षामंत्री ने क्या कहा? 
लेह में इंडियन एयरफोर्स स्टेशन पर वायु योद्धाओं से मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, ये वायु योद्धा किसी भी विपत्ति से लड़ने और किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। रक्षामंत्री ने कहा, आप जैसे जवानों के कारण ही हमारा भारत देश आज सुरक्षित है। भारत-चीन गतिरोध के समय आपने जो तैयारी की उसकी जितनी प्रशंसा की जाए, वो कम है। आगे भी अगर कोई हालात पैदा होंगे तो हम उसका बखूबी मुकाबला करेंगे।

2. मिलिट्री स्टेशन में रक्षामंत्री ने क्या कहा?
रक्षामंत्री ने कहा, आज लद्दाख के कारू में भारतीय सेना के बहादुर और बहादुर सैनिकों से मिलकर खुशी हुई। मैं उनके साहस और दृढ़ता को सलाम करता हूं। रक्षामंत्री ने कहा, जिन भी जवानों ने भारत की सीमा की सुरक्षा करते हुए शहादत दी है, देश उनकी शहादत को कभी भूल नहीं सकता... हमको अगर किसी ने आंख दिखाने की कोशिश की है तो उसको मुंह तोड़ जवाब भी हमने दिया है।

1. बीआरओ के कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन के निर्मित 63 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के बाद कहा, जिन सड़कों का निर्माण बीआरओ कर रहे हैं वह देश की विकास की गति को बढ़ाने वाले हैं। आज 63 पुल और सड़कों का लोकापर्ण हुआ। ये बीआरओ कर्मियों की सूझबूझ से हुआ है।

रक्षामंत्री ने कहा, हमारी भारतीय सेना ने यह सिद्ध कर दिया है कि उनमें शौर्य और पराक्रम के साथ संयम भी है। जहां संयम की आवश्यकता होती है हमारी सेना संयम भी बरतती है और जहां शौर्य और पराक्रम की आवश्यकता होती है, सेना वहां पर शौर्य और पराक्रम का भी परिचय देती है। हमारे यहां परम्परा रही है कि यदि हम शस्त्र भी धारण करते हैं तो केवल शांति की स्थापना के लिए। 

रक्षामंत्री ने कहा, मुझे सेना के शौर्य और पराक्रम पर पूरा विश्वास है और आंख दिखाने वालों को माकूल जवाब देने की कूवत उनके अन्दर है। उन्होंने कहा, आतंकवाद और सामाजिक-आर्थिक  विकास  के अभाव के कारण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित बनाने की आवश्यकता पड़ी और मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि UT बनने के बाद आतंकवादी गतिविधियों में कमी आई है और विकास में तेज़ी आयी है।

तीन दिवसीय लद्दाख दौरे पर है रक्षा मंत्री
बता दें कि राजनाथ सिंह तीन दिवसीय लद्दाख दौरे पर है। रविवार को अपने दौरे के पहले दिन उन्होंने करीब 300 पूर्व सैनिकों से मुलाकात की थी। उन्होंने यहां पर जवानों के साथ भारत माता की जय का नारा भी लगाया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हमारी सेना के जवानों, पूर्व सैनिकों के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में कितना सम्मान है, ये बताने की जरूरत नहीं है। 30-40 साल से वन रैंक, वन पेंशन की समस्या चली आ रही थी। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही वन रैंक, वन पेंशन की मांग को पूरा किया।

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