रिपोर्ट: 10 साल में 21 हजार से अधिक विदेशियों को मिली भारत की नागरिकता

रिपोर्ट: 10 साल में 21 हजार से अधिक विदेशियों को मिली भारत की नागरिकता

Bhaskar Hindi
Update: 2020-02-05 10:36 GMT
रिपोर्ट: 10 साल में 21 हजार से अधिक विदेशियों को मिली भारत की नागरिकता
हाईलाइट
  • 10 साल में 21 हजार से अधिक विदेशियों को दी गई भारतीय नागरिकता
  • मोदी सरकार के कार्यकाल में भी दी गई नागरिकता
  • यूपीए की सरकार में विदेशियों को मिली भारतीय नागरिकता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर जिस वक्त देश में हंगामा मचा है, उस वक्त जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में 21 हजार से ज्यादा विदेशियों को भारतीय नागरिकता मिली है। इन विदेशियों को पूर्व की मनमोहन और मौजूदा मोदी सरकार के कार्यकाल में नागरिकता मिली है।

लोकसभा में मंगलवार को तमिलनाडु के रामानाथपुरम से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद के. नवासखनी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने ये आंकड़े दिए हैं। गृहमंत्री से विदेशियों को मिली भारतीय नागरिकता का ब्यौरा मांगा गया था। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या बाहरी देशों के मुस्लिमों को अब भी भारतीय नागरिकता प्रदान की जा सकती है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में 21,408 विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता मिली है। उन्होंने वर्षवार आंकड़े देते हुए एक रिपोर्ट पेश की। नित्यानंद राय ने बताया कि 2015 में हुए भारत-बांग्लादेश भू सीमा समझौते के कारण बांग्लादेश के 53 एंक्लेव को भारत में शामिल किया गया था। जिसके कारण नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत उस वर्ष 14864 बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिकता दी गई थी।

दस साल में भारत की नागरिकता पाने वाले लोगों की संख्या

वर्ष संख्या
2010 232
2011 435
2012 553
2013 563
2014 617
2015 15,470
2016 1106
2017 817
2018 628
2019 987
कुल- 10 साल 21,408

 

गृह राज्य मंत्री ने बाहर के मुस्लिमों के देश की नागरिकता मिलने के सवाल पर कहा कि भारत के सभी वैध प्रवासियों को चाहे वह किसी भी धर्म के हों, नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार अगर योग्यता पूरी करते हैं तो नागरिकता ले सकते हैं। भारतीय नागरिकता हासिल करने की मौजूदा प्रक्रिया में कोई संशोधन नहीं हुआ है।

गृह राज्य मंत्री ने अवैध रूप से देश में घुसे बांग्लादेशियों को वापस भेजने के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2016 में 308, 2017 में 51 और 2018 में 445 बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई हुई।

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