चन्नी के लिए मुसीबत बनी राम रहीम की पेरोल पर रिहाई, इन सीटों पर डेरा ने पलट दिया कांग्रेस का गेम

पेरोल का चुनावी झोल! चन्नी के लिए मुसीबत बनी राम रहीम की पेरोल पर रिहाई, इन सीटों पर डेरा ने पलट दिया कांग्रेस का गेम

Anupam Tiwari
Update: 2022-02-23 11:28 GMT
चन्नी के लिए मुसीबत बनी राम रहीम की पेरोल पर रिहाई, इन सीटों पर डेरा ने पलट दिया कांग्रेस का गेम

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर बीते 20 फरवरी को मतदान हो चुका है। अब 10 मार्च को मतगणना होगी। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि क्या पंजाब में डेरा ने गेम चेंजर का काम किया है? गौरतलब है कि चुनाव वाले दिन पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने एक के बाद एक कई ऐसे ट्वीट के बाद यही कयास लगाए जा रह हैं कि क्या राम रहीम फैक्टर कारगर रहा? पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ट्वीट किया था कि अकाली दल और बीजेपी गठजोड़ खुलेआम दिख रहा है।

दोनों ही सच्चा सौदा से समर्थन ले रहे हैं। पंजाब की जनता इन बीडबी पार्टनर्स के खिलाफ एकजुट है। जनता अपने वोटों के जरिए इन्हें सबक सिखाएगी। धुरी में भगवंत मान और आम आदमी पार्टी ने डेरा से समर्थन मांगा है। ये सब पार्टियां निराशा में ऐसा कर रही हैं। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि पंजाब में कांग्रेस बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब में डेरा के राजनीति में भी कितना दबदबा है।

जानें डेरा ऐसे पहुंचाता है अपने समर्थकों तक संदेश

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पेरोल मिली थी। जिसके बाद से यही कयास लगाए जा रहे थे कि चुनाव को देखते हुए हरियाणा सरकार ने फैसला लिया है। राम रहीम 21 दिन के लिए रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर हैं। गौरतलब है कि डेरा की राजनीतिक विंग के पदाधिकारी अपने फैसले को 45 मेंबर कमेटी के जरिए समर्थकों तक पहुंचाते हैं। अलग-अलग गांवों में बनाए गए भंगीदास डेरे के वे सदस्य हैं, जो चर्चाघर में मंच के संचालन से जुड़े होते हैं।

गांव और शहर में नाम चर्चाघर के भंगीदास अलग-अलग होते हैं। इनके ऊपर ब्लॉक का भंगीदास होता है। डेरे से घर-घर को जोड़ने के लिए डेरा सच्चा सौदा चीफ गुरमीत राम रहीम ने इसकी शुरुआत की थी। बता दें कि डेरा अपने फैसले को गोपनीय रखता है। डेरा प्रेमियों को जुबानी संदेश भेजता है। डेरा सूत्रों के मुताबिक अबकी बार डेरा किसी भी एक पार्टी का समर्थन नही किया तथा क्षेत्रवार उम्मीदवारों के समर्थन का फैसला किया गया है। 

इन सीटों में डेरा ने दिखाया दम

डेरा की विंग के चेयरमैन राम सिंह राजनीतिक विंग के फैसले के बाद हर चुनाव की तरह इस बार भी वह अंडर ग्राउंड हैं। खबरें आ रही हैं कि राम सिंह का मोबाइल भी स्विच ऑफ है। गौरतलब है कि पंजाब के मालवा क्षेत्र के 14 जिलों में 69 सीटें हैं। यहां पर तकरीबन 45 सीटों पर डेरा का अपना प्रभाव रखता है। 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में डेरा सत्ता का सफर तय कराता है।  

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक डेरा ने मालवा क्षेत्र की मोड़ मंडी सीट पर बीजेपी, बठिंडा में आम आदमी पार्टी, बठिंडा देहात सीट पर शिरोमणि अकाली दल, बुढलाढा में आम आदमी पार्टी, सरदूलगढ़ में अकाली दल, अबोहर में बीजेपी, मुक्तसर में अकाली दल,सनौर (पटियाला) से बीजेपी, पटियाला से पंजाब लोक कांग्रेस, तलवंडी में निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया है। हालांकि 10 मार्च को मतगणना होने के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। 

डेरा ने इन पार्टियों को दिया साथ

पंजाब सियासत में डेरा अपना सीधा असर डालता है। पंजाब की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले लोग कहते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में डेरा ने अकाली दल को कई सीटों पर समर्थन दिया था। डेरा ने कांग्रेस को भी कई सीटों पर समर्थन किया था। हालांकि कांग्रेस को इसका फायदा भी मिला और सत्ता में आयी भी।

लोकसभा चुनाव 2019 में भी डेरा सच्चा ने भाजपा को समर्थन किया था। जिसकी वजह से हरियाणा और पंजाब में दोनों जगह भाजपा ने कई सीटें जीतीं थी और केंद्र में भी आसानी से सरकार बनाने में कामयाब रही। 2014 में डेरा सच्चा सौदा ने अकाली दल और बीजेपी को समर्थन दिया। यहां तक कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने गुरमीत के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया था। जिसके बाद राम रहीम ने भी खुले मंच से प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी। 


 

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