डिलीवरी के खर्च के बदले छीनी ममता ,नवजात को देने से किया इंकार

डिलीवरी के खर्च के बदले छीनी ममता ,नवजात को देने से किया इंकार

Anita Peddulwar
Update: 2019-03-15 05:30 GMT
डिलीवरी के खर्च के बदले छीनी ममता ,नवजात को देने से किया इंकार

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  9 माह की एक बच्ची की कस्टडी को लेकर झगड़ रही एक मां ने पुलिस की अकार्यक्षमता से परेशान होकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ की शरण ली है। उसका आरोप है कि पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने जबरन उसकी बच्ची को अपने कब्जे में ले लिया है। बीते 9 माह से वह समाज के मध्यस्थियों (मीडिएटर) और पुलिस की शरण में जा कर थक चुकी है। ऐसे में उसने हाईकोर्ट से इस मामले में दखल देकर बच्ची वापस दिलाने की प्रार्थना की है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने बच्ची को जन्म देने वाली मां को सौंप कर प्रतिवादी महिला को दो सप्ताह में शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. सैयद शाहिद, आदिल मोहम्मद और सैयद मुबशिरुद्दीन ने पक्ष रखा। 

पहले थी दोनों में दोस्ती
यह प्रसंग शहर के हसनबाग निवासी शीना (परिवर्तित नाम) और उसकी पड़ोसन शबनम (परिवर्तित नाम) का है। दोनों के परिवार कहीं बाहर से आकर नागपुर के हसनबाग में बसे हैं। शीना का पति मजदूरी करता है। शबनम ब्याज पर पैसे बांटती है और उसका पति व्यवसाय करता है। शीना और शबनम में गहरी दोस्ती थी। दोनों एक दूसरे का सुख-दु:ख साझा करती थीं। शबनम का एक विवाह पहले ही टूट चुका था। नई शादी से उसे कोई संतान नहीं थी। इधर, शीना पहले ही तीन बेटों की मां है। वर्ष 2017 में उसने गर्भधारण किया। हाईकोर्ट में चले युक्तिवाद में दावा किया गया कि दोनों ने मौखिक सहमति बनाई कि जन्म होने के बाद शबनम बच्चे को गोद ले लेगी। बदले में डिलीवरी खर्च उठाएगी।

ये है याचिकाकर्ता का दावा
शीना द्वारा कोर्ट में दायर याचिका में दावा है कि 27 जून 2018  को उसने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद शबनम ने बड़ी चालाकी से शीना से कहा कि उसने जो पैसे उधार लिए हैं, उसे एक स्टैंप पेपर पर लिखवा लेना चाहिए। आरोप है कि उसने बहला-फुसला कर स्टैंप पेपर पर हस्ताक्षर ले लिए। बच्ची के जन्म के पांच दिन बाद ही शबनम उसके साथ खेलने के लिए उसे घर ले गई। फिर बच्ची लौटाने से ना-नुकुर करने लगी। इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ, तो शबनम ने दबंगई के साथ बच्ची रख कर शीना को उलटे पांव लौटा दिया। इसके बाद शीना ने समुदाय के लोगों के साथ मामले में मध्यस्थी से हल निकालने की कोशिश की। हल नहीं निकला तो अक्टूबर 2018 में तीन बार नंदनवन पुलिस में शिकायत भी की। कोई मदद न मिलने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 

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