गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें इसलिए अनपढ़ वृद्ध ने दान कर दी अपनी जमीन

 गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें इसलिए अनपढ़ वृद्ध ने दान कर दी अपनी जमीन

Bhaskar Hindi
Update: 2019-09-02 08:56 GMT
 गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें इसलिए अनपढ़ वृद्ध ने दान कर दी अपनी जमीन
हाईलाइट
  • अफसरों का मानना है कुपोषण के विरुद्ध जागरुकता फैलाने में यह कदम आगे चलकर नींव का पत्थर साबित होगा
  • समारू कोल ने आंगनबाड़ी के लिए अपनी जमीन दान देकर दिया अच्छा संदेश

डिजिटल डेस्क, उमरिया। यहां एक वृद्ध समारू कोल ने आंगनबाड़ी के लिए अपनी जमीन दान देकर अच्छा संदेश दिया है। यह परिवार आंगनबाड़ी संचालन में मदद भी करता है। नौरोजाबाद मौहार दफाई में स्थानीय लोगों की सहभागिता को देखते हुए अब इसे मॉडल के रूप में चुना गया है। अफसरों का मानना है कुपोषण के विरुद्ध जागरुकता फैलाने में यह कदम आगे चलकर नींव का पत्थर साबित होगा।

दान की जमीन
करकेली परियोजना अंतर्गत नौरोजाबाद शहरी क्षेत्र में यह केन्द्र वार्ड क्रमांक पांच मौहार दफाई का है। तीन साल पहले यह केन्द्र बाजारपुरा स्थिति निजी भवन में संचालित था। भवन में जगह का अभाव था। रिहायशी इलाका होने से बच्चों की उपस्थिति भी कम रहती थी। लिहाजा शासन की मंशानुसार खुद के भवन की तलाश शुरू हुई। बजट प्राप्त होते ही जनप्रतिनिधियों की मदद से परियोजना की टीम जमीन की तलाश में खेरमाता मंदिर के पास समारू कोल के पास पहुंची। उसने बस्ती के बच्चों के विकास के लिए योजना का खाका सुनते ही झट से जमीन देने के लिए हामी भर दी। करीब 1500 वर्गफीट रकबे में एक कमरा, किचन, बाथरूम, गैलरी तथा सामने का कैम्पस बनकर तैयार हो गया। 3 साल से 30 बच्चे पोषण आहार गृहण कर महिलाएं यहीं से विभागीय योजनाओं का लाभ लेती हैं।

विरासत को आगे बढ़ा रहा परिवार
ज्ञात हो कि समारू कोल का दो साल पहले स्वर्गवास हो गया था। इसके बाद एकलौते पुत्र नन्नेलाल की संतान यानि तीसरी पीढ़ी (नाती) देवानंद कोल व उसका परिवार पानी व देखरेख जैसे कार्यों में मदद कर समाजसेवा की परंपरा को नया आयाम दे रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमनलता अहिरवार ने बताया देवानंद व उनका परिवार अक्सर देखरेख से लेकर पानी व अन्य सुविधा में बराबर मदद करता है।

मॉडल के रूप में चयनित
स्थानीय लोगों के सहयोग व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका की सक्रियता को देखते हुए 28 अगस्त को इसे मॉडल आंगनबाड़ी के रूप में चयनित किया जा चुका है। 35 पंजीकृत बच्चे वाले इस केन्द्र को अब प्ले स्कूल की भांति विकसित किया जाएगा। केन्द्र में आकर्षक शैक्षिक माहौल, खेलकूद गतिविधियों के लिए खिलौने, कुर्सियां दी गई हैं। पढ़ाई के लिए शासन ने पुस्तकें भी भेजी हैं। बकायदा बच्चों को ड्रेस दिया जाएगा। पठन पाठन व खेल कूद गतिविधियां रिपोर्ट कार्ड में दर्ज होंगी। फिर हर हफ्ते बच्चे के अभिभावकों को इससे अवगत कराया जाएगा।

करकेली के परियोजना अधिकारी सुनेन्द्र सदाफल ने कहा- जिले में पहली बार शहर की जमीन किसी आदिवासी व्यक्ति की पहल से विभाग को मिली है। जमीन न मिलने से हमे पहले काफी दिक्कत हुई। अब मॉडल के रूप में विकसित कर आदिवासी बस्ती को सुपोषित कर मिनी प्ले स्कूल जैसी सुविधा दिलाएंगे। यही नहीं शैक्षिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक कर्मचारी की मांग भी मप्र. शासन को भेजा गया है।

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