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Hyundai Alcazar भारत में 16.30 लाख रुपए में हुई लॉन्च, जानें इसकी खूबियां


हाईलाइट

  • Alcazar में 6 और 7 सीटर विकल्प मिलता है
  • 6 ट्रिम्स के साथ कुल 17 वैरिएंट में उपलब्ध होगी
  • टॉप वैरिएंट की कीमत 19.99 लाख रुपए रखी है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की वाहन निर्माता कंपनी Hyundai (ह्युंदै) ने भारत में बुहचर्चित एसयूवी Alcazar (अल्काजार) को शुक्रवार को लॉन्च कर दिया है। भारतीय बाजार में कंपनी की यह 5वीं एसयूवी है। इस एसयूवी के साथ ही कंपनी ने नए सेगमेंट में कदम रख लिया है। Alcazar को 6 और 7 सीटर विकल्प के साथ लॉन्च किया गया है। यह एसयूवी कुल 6 वैरिएंट और दो इंजन व दो गियरबॉक्स विकल्प के साथ उपलब्ध होगी। बता दें कि इस Hyundai Alcazar की बुकिंग पहले ही शुरू कर दी गई थी। 

बात करें कीमत की तो Hyundai Alcazar को 16.30 लाख रुपए की शुरआती कीमत में लॉन्च किया गया है। जबकि इसके टॉप वैरिएंट की कीमत 19.99 लाख रुपए रखी गई है। 

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कुल 6 ट्रिम्स 17 वैरिएंट 
Hyundai Alcazar एसयूवी 6 वैरिएंट में उपलब्ध होगी। इनमें सिग्नेचर (बेस वेरिएंट), सिग्नेचर (O), प्रेस्टीज, प्रेस्टीज (O), प्लेटिनम और टॉप मॉडल प्लेटिनम (O) वैरिएंट में शामिल है। हालांकि इन 6 ट्रिम्स को सीटिंग कन्फिगरेशन, इंजन और गियरबॉक्स कॉम्बिनेशन के आधार पर कुल 17 वैरिएंट में बांटा गया है।

रंगों का विकल्प
Alcazar एसयूवी 6 कलर ऑप्शन टाइफून सिल्वर, टाइटन ग्रे, टैगा ब्राउन, स्टारी नाइट, पोलर व्हाइट और फैंटम ब्लैक में उपलब्ध होगी। इसका डुअल-टोन सिग्नेचर वैरिएंट में सिर्फ फैंटम ब्लैक रूफ व टाइटन ग्रे रंग के साथ उपलब्ध होगा। जबकि सिग्नेचर (O) डुअल टोन दो रंग विकल्प - ब्लैक फैंटम रूफ के साथ पोलर वाइट व फैंटम ब्लैक रूफ के साथ टाइटन ग्रे में उपलब्ध होगा।

एक्सटीरियर और डिजाइन
इसके फ्रंट से यह क्रेटा की तरह नजर आती है, हालांकि पीछे से इसकी डिजाइन में क्रेटा के मुकाबले काफी बदलाव किए गए हैं। इसमें नई ग्रिल मिलती है साथ ही बम्पर को भी अपडेट किया गया है। इसके अलावा इसमें नए रैपअराउंड LED टेल लैंप, हाई-माउंटेड स्टॉप लैंप और शार्क फिन एंटीना मिलता है। साथ ही इस एसयूवी में पीछे फौक्स डुअल एग्जॉस्ट टिप्स दिए गए हैं। इसमें 18 इंच के अलॉय व्हील दिए गए हैं। जबकि 50 लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है।

इंटीरियर और फीचर्स
Alcazar सात-सीटर और छह-सीटर विकल्प के रूप में आती है। 6-सीटर वैरिएंट के बीच वाली पंक्ति में दो कैप्टन सीटें दी गई हैं। कैप्टन सीटों के बीच में एक सेंट्रल कंसोल दिया गया है जिसमें आर्म रेस्ट, मोबाइल फोन चार्जर और कप होल्डर दिए गए हैं। वहीं 7-सीटर वैरिएंट में दूसरी पंक्ति में एक सेंट्रल आर्मरेस्ट के साथ फोल्ड होने वाली सीट मिलती है।

फीचर्स की बात करें तो, इसमें 10.25-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो कि एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इसमें पैनारोमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, ड्राइवर सीट के लिए इलेक्ट्रिक एडजस्टमेंट, एक्यूआई डिस्प्ले के साथ एयर प्यूरीफायर, एम्बिएंट लाइटिंग के लिए 64 कलर्स, पडल लैंप, 360-डिग्री पार्किंग कैमरा आदि के साथ बेहतर साउंड के लिए बोस साउंड सिस्टम दिया गया है। इस एसयूवी में तीन ड्राइव मोड- कम्फर्ट, ईको व स्पोर्ट के अलावा ट्रैक्शन कंट्रोल मोड- स्नो, सैंड व मड दिया गया है।

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इंजन और पावर
इस एसयूवी में पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन का विकल्प मिलता है। इसमें 2.0-लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन 159 bhp की अधिकतम पॉवर व 191 nm का टार्क प्रदान करता है। इसमें 6 स्पीड मैन्युअल व 6 स्पीड ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का विकल्प दिया गया है। पेट्रोल इंजन मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ 14.5 किमी/लीटर का माइलेज देता है, जबकि ऑटोमेटिक गियरबॉक्स के साथ 14.2 किमी/लीटर का माइलेज देगा।

वहीं इसका 1.5-लीटर डीजल इंजन 115 bhp का पॉवर व 250 nm का टार्क प्रदान करता है। इसमें भी 6 स्पीड मैन्युअल व 6 स्पीड ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का विकल्प दिया गया है। यह इंजन मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ 20.4 किमी/लीटर व ऑटोमेटिक गियरबॉक्स के साथ 18.1 किमी/लीटर का माइलेज देगा।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।