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मर्जर का प्रस्ताव खारिज, इंडिया बुल्स-लक्ष्मी विलास के शेयरों में भारी गिरावट

मर्जर का प्रस्ताव खारिज, इंडिया बुल्स-लक्ष्मी विलास के शेयरों में भारी गिरावट

हाईलाइट

  • इंडिया बुल्स-लक्ष्मी विलास के मर्जर का प्रस्ताव आरबीआई ने खारिज कर दिया
  • प्रस्ताव खारिज होने के बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई
  • इंडिया बुल्स का शेयर लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और लक्ष्मी विलास बैंक के विलय के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद इन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। गुरुवार के कारोबारी सत्र में लक्ष्मी विलास बैंक के शेयर में 4.82% का लोअर सर्किट लगा तो वहीं इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के शेयर में भी लगभग 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने का मिली।

इन दोनों कंपनियों के शेयरों ने 52 हफ्तों का नया लो भी बनाया। इंडिया बुल्स हाइसिंग फाइनेंस का शेयर गुरुवार सुबह करीब 10 रुपए की गिरावट के साथ 229 रुपए पर खुला और दिनभर के कारोबार में इसने 185.30 रुपए के स्तर को छुआ जो कि 52 हफ्तों का निचला स्तर भी है। 19.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 193.60 रुपए पर बंद हुआ।  लक्ष्मी विलास बैंक की बात करें तो यह  4.82% की गिरावट के साथ 25.65 रुपए पर खुला और लोअर सर्किट पर बंद भी हुआ। बुधवार को यह 26.95 रुपए पर बंद हुआ था।

रिज़र्व बैंक ने नॉन-बैंकिंग लेंडर इंडिया बुल्स हाइसिंग फाइनेंस (IBHF) के साथ लक्ष्मी विलास बैंक (LVB)  के साथ विलय के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। दोनों कंपनियों ने RBI के फैसले के बारे में बुधवार देर शाम सूचित किया, लेकिन इसके कारणों की स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दी। अगर RBI ने इस मर्जर को मंजूरी दे दी होती, तो यह पहली ऐसी घटना होती, जहां एक नॉन-बैंकिंग लेंडर का देश के किसी बैंक में विलय होता।

लक्ष्मी विलास बैंक के लिए ये मर्जर काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे बैंक को पूंजी जुटाने में मदद मिलती, जो केंद्रीय बैंक के वर्तमान में लगाए गए पीसीए प्रतिबंधों को लिफ्ट करने के लिए आवश्यक है।

इंडियाबुल्स हाउसिंग भी केंद्रीय बैंक के फैसले से प्रभावित होगा क्योंकि वह अपने ऐसेट बेस में विविधता लाना चाह रहा था। सौदा खारिज होने के बाद, इंडियाबुल्स हाउसिंग के कार्यकारी निदेशक अजीत कुमार मित्तल ने कहा कि अब प्रस्तावित विलय योजना को लेकर बाजार में कोई अनिश्चितता नहीं होगी।

ग्रुप, जो वर्तमान में अपने रियल एस्टेट बिजनेस से बाहर निकलने के विकल्प की तलाश कर रहा है, पहले ही अपनी कई संपत्तियां निजी इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन को बेच चुका है। इस बीच, कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 14 अक्टूबर को फिर से बैठक करेगा।

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस उस समय रियल एस्टेट के कारोबार से ऐसे समय में बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है जब उस पर गंभीर उल्लंघन के आरोप लगे हैं। इंडियाबुल्स के खिलाफ एक पीआईएल भी लगाई गई है जिसमें विशेष जांच दल से इस मामले की जांच की मांग की जा रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।