अकोला मनपा: अवैध पदोन्नति घोटाले पर सख्त कार्रवाई के आदेश, एसपी और मनपा आयुक्त को जांच के निर्देश

अवैध पदोन्नति घोटाले पर सख्त कार्रवाई के आदेश, एसपी और मनपा आयुक्त को जांच के निर्देश
  • जिलाधिकारी कार्यालय ने एसआईटी/एसीबी जांच और आपराधिक कार्रवाई के दिए आदेश
  • नियमों की अनदेखी कर अपात्र कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति देने का आरोप
  • अवैध वेतन-भत्तों की 18% ब्याज सहित वसूली और बीएनएस के तहत एफआईआर की तैयारी
  • नियमों की अनदेखी कर पदोन्नति का आरोप

डिजिटल डेस्क, अकोला। महानगरपालिका में नियमों को ताक पर रखकर की गई कथित अवैध पदोन्नतियों के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलादंडाधिकारी तथा जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस अधीक्षक और महानगरपालिका आयुक्त को पत्र जारी कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई शिवनगर (पुराना शहर) निवासी नागरिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता गणेश गजाननराव कुरई द्वारा 22 सितंबर 2026 को प्रस्तुत शिकायत के बाद शुरू हुई है। शिकायत में महानगरपालिका में वर्षों से नियमों का उल्लंघन कर की गई पदोन्नतियों और इससे सरकारी कोष को हुए कथित नुकसान का उल्लेख किया गया है।

नियमों की अनदेखी कर पदोन्नति का आरोप

आधिकारिक पत्र के अनुसार, अकोला महानगरपालिका में वर्ष 2009 से 2012 के बीच बड़े पैमाने पर पदोन्नतियां की गईं। आरोप है कि इन पदोन्नतियों के लिए नगर विकास विभाग के 26 सितंबर 2007 के पत्र की गलत व्याख्या की गई। साथ ही 2 जुलाई 2008 के शासन निर्णय और एमएमसी एक्ट के प्रावधानों की भी अनदेखी की गई।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अपात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देने के लिए उनके गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) में कथित रूप से हेरफेर किया गया। पिछड़ा वर्ग आयोग के दिशा-निर्देशों और बिंदु नामावली (रोस्टर) के नियमों का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के ‘रफीक मसीह’ फैसले के निर्देशों की भी अनदेखी किए जाने का दावा किया गया है।

लोकल फंड ऑडिट में सामने आई अनियमितताएं

महानगरपालिका की 12 जुलाई 2012 की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक के कार्यवृत्त के आधार पर हुई स्थानीय निधि लेखापरीक्षा में कथित अनियमितताएं सामने आईं। ऑडिट में गैर-तकनीकी श्रेणी के कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग के उच्च पदों पर पदोन्नति दिए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है।

आरोप है कि इन पदोन्नतियों के बाद संबंधित कर्मचारियों को उच्च वेतनमान और भत्तों का भुगतान किया गया, जिससे मनपा के कोष पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा। इस मामले में विट्ठल देवकते, अमोल डोईफोड़े और विजय पारतवार सहित विभागीय पदोन्नति समिति के सदस्यों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।

18% ब्याज सहित वसूली और एफआईआर की तैयारी

प्रशासन ने शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कथित रूप से नियम विरुद्ध की गई पदोन्नतियों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वर्ष 2010 से अब तक उच्च वेतनमान, भत्तों और अन्य आर्थिक लाभों के रूप में भुगतान की गई राशि की 18% ब्याज सहित वसूली किए जाने की बात कही गई है।

मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और डीपीसी सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई की तैयारी है। जिलाधिकारी कार्यालय ने पूरे प्रकरण की एसआईटी अथवा एसीबी से जांच कराने और कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश पुलिस अधीक्षक और मनपा आयुक्त को दिए हैं।

Created On :   30 Sept 2026 10:02 PM IST

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