संभागीय आयुक्त के निर्देश: सूखे की गंभीर स्थिति में चारा-पानी को दें पहली प्राथमिकता, हर गांव और खेड़े के लिए अगले 10 महीनों का सूक्ष्म नियोजन

सूखे की गंभीर स्थिति में चारा-पानी को दें पहली प्राथमिकता, हर गांव और खेड़े के लिए अगले 10 महीनों का सूक्ष्म नियोजन
  • बीड में 63 गांव और 71 वाडियां टैंकरों पर निर्भर
  • जलाशयों में केवल 16.38 प्रतिशत पानी
  • हर गांव और खेड़े के लिए अगले 10 महीनों का सूक्ष्म नियोजन

डिजिटल डेस्क, बीड। जिले में गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए चारा और पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक गांव और तांडे के लिए सूक्ष्म नियोजन कर आगामी 10 महीनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की जाए। ऐसे निर्देश संभागीय आयुक्त श्रीकांत ने दिए। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में संभागीय आयुक्त ने सूखा, खरीफ सीजन और राजस्व विभाग के विभिन्न उपक्रमों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, परिवीक्षाधीन सहायक जिलाधिकारी दिव्यांक गुप्ता, सभी विभागों के प्रमुख, तहसीलदार, उपविभागीय अधिकारी और तालुका कृषि अधिकारी उपस्थित थे।

अगले दस महीनों के लिए गांववार नियोजन

आयुक्त श्रीकांत ने कहा कि तहसीलदार, गटविकास अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी और उपविभागीय अधिकारी प्रत्येक गांव का प्रत्यक्ष निरीक्षण करें। आगामी दस महीनों के लिए पानी और चारे की उपलब्धता का नियोजन किया जाए। केवल टैंकरों पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालीन उपाय किए जाएं। जहां टैंकर के खर्च की तुलना में अस्थायी पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाना संभव हो, वहां इस विकल्प पर विचार किया जाए।

जरूरत वाले स्थानों पर टैंकर फिलिंग पॉइंट बनाए जाएं। पानी चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी उन्होंने जिलाधिकारी को दिए। उपलब्ध पानी का उपयोग केवल पीने के लिए करने की अपील उन्होंने नागरिकों से की।

सूखे की स्थिति में प्रत्येक गांव में रोजगार गारंटी योजना के काम शुरू रहें, प्रत्येक जरूरतमंद को काम मिले और उसका भुगतान समय पर हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। गरीबी के कारण अनुचित घटनाएं न हों, इसके लिए जिले में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

बीड में गंभीर होती जा रही सूखे की स्थिति

30 सितंबर तक जिले में औसतन 566.1 मिमी बारिश अपेक्षित थी, जबकि प्रत्यक्ष में केवल 356.6 मिमी यानी करीब 63 प्रतिशत बारिश हुई। केज तहसील में सर्वाधिक 93.4 प्रतिशत और गेवराई में सबसे कम 42.5 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।

भूजल स्तर में भारी गिरावट

निरीक्षण कुओं में औसत जलस्तर 7.36 मीटर तक नीचे चला गया है। पिछले पांच वर्षों की सितंबर की औसत स्थिति 2.81 मीटर की तुलना में इस बार जलस्तर 4.55 मीटर अधिक नीचे है। जांच किए गए सभी 126 कुओं में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। गेवराई में सर्वाधिक 6.64 मीटर की गिरावट हुई है।

जलाशयों में केवल 16.38 प्रतिशत पानी

जिले के 164 जल प्रकल्पों में केवल 16.38 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह बचा है। माजलगांव प्रकल्प में 28.53 प्रतिशत, मध्यम प्रकल्पों में 12.49 प्रतिशत और लघु प्रकल्पों में केवल 5.49 प्रतिशत पानी है। जिले के 32 प्रकल्प पूरी तरह सूख चुके हैं।

63 गांवों और 71 वाडियों में टैंकर

29 सितंबर तक 63 गांवों और 71 वाडियों के करीब 2.11 लाख लोगों को 143 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। 28 गांवों और 32 स्थानों पर कुएं तथा बोर अधिग्रहित किए गए हैं। अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक के लिए टंचाई कृति आराखड़ा तैयार किया जा रहा है, जिसे सरकार को भेजा जाएगा।

चारे का स्टॉक औसतन 37 दिनों का : जिले में उपलब्ध चारा औसतन करीब 37 दिनों तक चलने का अनुमान है। पाटोदा में केवल 21 दिन और आष्टी में 27 दिन का चारा उपलब्ध है। वहीं परली में सबसे अधिक करीब 70 दिनों का चारा स्टॉक उपलब्ध है।

खरीफ फसलों को भारी नुकसान

खरीफ सीजन में जिले में 8,08,946 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई अपेक्षित थी, जबकि 7,87,218 हेक्टेयर यानी 97.31 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई हुई। सोयाबीन की बुवाई 137.90 प्रतिशत और कपास की 78.36 प्रतिशत हुई है।

प्राथमिक निरीक्षण में जिले के सभी 11 तहसीलों में 75 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान सामने आया है। प्रभावित क्षेत्र करीब 5.14 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत आष्टी, बीड और गेवराई में तीन परियोजनाओं के लिए 2,341.33 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके माध्यम से 10,642 हेक्टेयर क्षेत्र में जल एवं मृदा संरक्षण संबंधी उपचार किए जाएंगे।

कार्यालयों में स्वच्छता पर सख्ती

सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक सोमवार सुबह एक घंटे तक स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। 9 अक्टूबर के बाद कार्यालय या शौचालय में गंदगी पाए जाने पर कार्यालय प्रमुख एवं संबंधित अधिकारियों पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

शौचालय अस्वच्छ पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के केबिन में मौजूद शौचालय सील करने के निर्देश भी दिए गए हैं। महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 22 सेवाएं

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक राज्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत फेरफार नोंद, जीवित सातबारा, स्वामित्व सनद, राशन कार्ड और विभिन्न प्रमाणपत्रों सहित 22 सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।

‘छत्रपति शिवाजी महाराज राजस्व समाधान शिविर’ 6 से 15 अक्टूबर के बीच सभी तहसीलों में आयोजित किए जाएंगे। ‘राष्ट्रनेता से राष्ट्रपिता’ अभियान के तहत विमुक्त जाति एवं घुमंतू जनजाति के नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ और प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। बीड तहसील में 1 अक्टूबर को आयोजित शिविर में 68 लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया।

Created On :   2 Oct 2026 7:28 PM IST

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