Bhandara News: बावनथड़ी के प्रकल्पग्रस्त नहर में उतरे, किया पानी रोको आंदोलन

  • सुसुरडोह, कमकासुर और सीतेकसा गांवों के किसानों की उपजाऊ जमीन की गई थी अधिग्रहित
  • चालीस साल बाद भी पुनर्वास की आस

Bhandara News बावनथड़ी प्रकल्प पूरा हुए चार दशक बीत जाने के बावजूद प्रकल्पग्रस्तों के पुनर्वसन की समस्या जस की तस बनी हुई है। शासन की लगातार अनदेखी से आक्रोशित किसानों और प्रभावित परिवारों ने बुधवार, 6 मई को बावनथड़ी संघर्ष समिति के नेतृत्व में मुख्य नहर में उतरकर ‘पानी रोको’ आंदोलन किया। महाराष्ट्र सर्कल परिसर में हुए इस प्रदर्शन से इलाके में तनाव का माहौल बन गया, वहीं सुरक्षा के मद्देनज़र भारी पुलिस बल तैनात किया गया। बावनथड़ी नदी तट पर बसे सुसुरडोह, कमकासुर और सितेकसा गांवों के किसानों की सिंचित जमीन प्रकल्प के लिए अधिग्रहित की गई थी।

प्रभावित किसानों का आरोप है कि उन्हें बेहद कम मुआवजा दिया गया, जिससे उनके सामने बेरोजगारी और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुनर्वसित गांवों में आज भी सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। हाल ही में, लगभग 15 दिन पहले जिलाधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने सितेकसा गांव का दौरा किया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने भी प्रकल्पग्रस्तों के रोष को और बढ़ा दिया है।

बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों ने लिया हिस्सा : संघर्ष समिति के अध्यक्ष किशोर उईके के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में पूर्व जिला परिषद सदस्य अशोक उईके, पूर्व नगरसेवक लक्ष्मीकांत सलामे, मनोज उईके, रोहित मरस्कोल्हे, भीमराव नैताम, सचिन उईके, बेनी धुर्वे, बालिक भलावी, भीकराम नैताम, सुलोचना उईके, शारजा उईके, रवींद्र लांजेवार, पदमा उईके, अल्का भलावी सहित सैकड़ों प्रकल्पग्रस्त शामिल हुए।

Created On :   7 May 2026 4:11 PM IST

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