MP News: राजनीति शास्त्र वाले बाजार की गाइडलाइन से 12वीं के छात्रों को पढ़ा रहे फिजिक्स, ईएसबी की परीक्षा पर भी सवाल

राजनीति शास्त्र वाले बाजार की गाइडलाइन से 12वीं के छात्रों को पढ़ा रहे फिजिक्स, ईएसबी की परीक्षा पर भी सवाल

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। मप्र कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर प्रदेश की स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, खेलकूद और प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति पर सवाल उठाए। नायक ने कहा कि शिक्षकों की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पन्ना जिले के पवई ब्लॉक के मोहंदरा शासकीय कन्या विद्यालय में बीए और एमए राजनीति शास्त्र के शिक्षक 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भौतिकी पढ़ाते मिले।

शिक्षकों ने बाजार से खरीदी गई गाइड देखकर छात्रों को पढ़ाया। प्रदेश के 7217 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में लगभग 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। आरोप लगाया कि खेल और रेड क्रॉस के नाम पर विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस का दुरुपयोग हो रहा। कई जगह धन का इस्तेमाल अधिकारियों और शिक्षकों के एसी, पर्दे और अन्य सुविधाओं पर किए जाने की शिकायतें हैं। खिलाड़ियों को खेल किट, ब्लेजर और यात्रा जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए भी पर्याप्त सहायता नहीं मिलती। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की स्थिति सही नहीं है। कई जगह असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण खिलाड़ी वहां जाने से डरते हैं।

अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को लाकर फर्जी उपस्थिति की शिकायत

नायक ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं और समय पर परीक्षाएं नहीं हो रहीं। छात्रों को वर्षों तक डिग्रियां नहीं मिल रहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे। प्रदेश में 463 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया। वहीं मिड-डे मील और पोषण आहार में अनियमितताओं के कारण प्राथमिक स्तर के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश में 54 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं, लेकिन इनके नियम और गुणवत्ता की स्थिति पर गंभीर सवाल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि नियामक संस्थाएं वास्तविक भौतिक सत्यापन के बजाय फाइलों के आधार पर नए विश्वविद्यालयों को मंजूरी दे रहीं। कई विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं लगतीं और परीक्षाओं का भी कोई निश्चित समय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों, विशेषकर दिल्ली, हरियाणा, बिहार, झारखंड आदि से एजेंटों के जरिए विद्यार्थियों को लाकर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। परीक्षा के छह महीने से एक साल तक परिणाम घोषित नहीं होते और विद्यार्थियों को चार-चार साल तक डिग्री नहीं मिलती। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में टेक्नोलाजी क्षेत्रों से जुड़े आधुनिक और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का पर्याप्त विकास नहीं दिखाई देता। छात्रों की गूंज में राहुल गांधी छात्रों से परेशानियों पर चर्चा करेंगे।

ईएसबी के परीक्षा कैलेंडर पर सवाल

कांग्रेस नेता स्वतंत्र सिंह चौहान ने प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि व्यापमं का परीक्षा कैलेंडर समय पर लागू नहीं होता। दो लाख विद्यार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा भी एक साथ आयोजित करने के बजाय कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाती है। आरोप लगाया कि शिफ्टों के अंतर को दूर करने के नाम पर अपनाई जाने वाली नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट नहीं है। इससे परीक्षा परिणामों और अंकों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। एमपीपीएससी की बार बार गलतियों पर भी सवाल उठते हैं।

Created On :   9 Sept 2026 1:27 AM IST

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