Dhar Bhojshala: भोजशाला फैसले पर AIMIM नेता ने दी तीखी प्रतिक्रिया, 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को किया नजरअंदाज'

भोजशाला फैसले पर AIMIM नेता ने दी तीखी प्रतिक्रिया, प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को किया नजरअंदाज

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य-प्रदेश के धार में भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर एमपी हाई कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा इस स्थल पर मंदिर था इसलिए यहां हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार है। कोर्ट के इस निर्णय पर जमकर सियासत हो रही है। इस मुद्दे पर AIMIM पार्टी के प्रवक्ता वारिस पठान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा मैं एमपी हाई कोर्ट के फैसले से असहमत हूं।

वारिस पठान ने कहा, ''भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई के फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। यह गलत और निराशाजनक फैसला है। इसमें बहुत सारी चीजों को मद्देनजर नहीं रखा गया। इसमें इन्होंने वक्फ के कानून को साइड में कर दिया। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 जो था, उसको भी नहीं माना गया। ये प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट क्यों आया था? इसमें साफ तौर से लिखा गया है कि धार्मिक स्थलों के नेचर चेंज नहीं कर सकते हैं।''

सुप्रीम कोर्ट HC के जजमेंट को सही करेगा- AIMIM नेता

वारिस पठान ने ये भी कहा 242 पेज का जजमेंट है, पूरा जजमेंट तो मैंने नहीं पढ़ा है। पहले भी ऐसा ही हुआ। बाबरी मस्जिद के अंदर क्या हुआ? उन्होंने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने बोला था कि वहां ऐसा कोई सबूत नहीं मिला था जिससे यह तय हो कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है। इसके बावजूद जजमेंट आ गया। आस्था की बुनियाद के ऊपर आपने जजमेंट दे दिया। अब यहां पर भी यही हो रहा है. वहां के वकील के भी बयान आए हुए हैं। सभी ने कहा है कि जजमेंट पढ़कर सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे। मुझे यकीन है कि जब इसे चैलेंज किया जाएगा तो सुप्रीम कोर्ट इस जजमेंट को सही करेगा।''

Created On :   15 May 2026 11:44 PM IST

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