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सागर में जहरीली शराब से मौत मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर 3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। सागर जिले के बंडा तहसील के 3 गांवों (गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन) में जहरीली शराब से हुईं मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर रविवार को 3 अिधकारियों को सस्पेंड कर दिया गया। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने प्रथम दृष्टया सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त के आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को प्रथम दृष्टया दोषी माना है। तीनों को सस्पेंड कर दिया है। समान रूप से जिम्मेदार मानते हुए उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया।
उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री (उप मुख्यमंत्री) राजेंद्र शुक्ल और संबंधित अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। सागर संभागायुक्त अिनल सुचारी, कलेक्टर प्रतिभा पाल, आईजी-एसची सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शराब सेवन से मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण है। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।
इधर, कांग्रेस ने मांगे मंत्रियों के इस्तीफे
जहरीली शराब हुई मौतों के मामले में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने कहा कि यह हादसा नहीं, सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही है। सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या 11 है, जबकि स्थानीय सूत्रों के अनुसार मृतकों की संख्या 18 से ज्यादा है। 24 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। यदि अवैध और जहरीली शराब की आपूर्ति की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सवाल सीधे पुलिस, आबकारी विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर उठता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर में पकड़े गए आरोपियों ने बंडा में जहरीली और नकली शराब की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आने के बावजूद मप्र पुलिस और आबकारी विभाग ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराब, ड्रग, रेत और भू-माफियाओं का गठजोड़ लगातार मजबूत होता जा रहा है।
प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं में बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार मंत्रियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती। वर्ष 2021 में भी जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन उसके बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। हाल ही में गुजरात में पकड़ी गई अवैध शराब का संबंध उज्जैन से सामने आने की बात भी कही गई है। वहीं भोपाल में लगभग 1800 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़े जाने की घटना भी राज्य में सक्रिय माफिया तंत्र पर सवाल खड़े करती है।
चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध शराब का नेटवर्क लगातार फैल रहा है और कई स्थानों पर डायरियों के जरिए शराब की बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि हर घटना के बाद छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचती है। आबकारी कमिश्नर और संबंधित मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती।
Created On :   8 Sept 2026 1:47 AM IST












