Chandrapur News: अब नहीं रहेगा बाघों का खौफ, ‘तारू उद्यान’ से बदलेगी गांवों की तस्वीर

  • ताड़ोबा बफर क्षेत्र के 6 गांवों में बने ‘तारू उद्यान’
  • 95 गांवों तक विस्तार की योजना
  • मनोरंजन के साथ जागरूकता पर भी जोर

Chandrapur News ताड़ोबा-अंधारी बाघ प्रकल्प के बफर क्षेत्र में बाघों की बढ़ती गतिविधियों से ग्रामीणों का जीवन लंबे समय से भय के साए में गुजर रहा है। कई गांवों में स्थिति ऐसी है कि लोग सूर्यास्त से पहले ही घर लौट आते हैं और रात में बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। इस कारण ग्रामीणों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ताड़ोबा प्रबंधन ने एक अनोखी और सकारात्मक पहल शुरू की है।

बफर क्षेत्र के गांवों में "तारू उद्यान' विकसित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीण सुरक्षित वातावरण में समय बिता सकें। इस पहल का उद्देश्य बच्चों, बुजुर्गों और सभी आयु वर्ग के लोगों को भयमुक्त माहौल में मनोरंजन और शारीरिक गतिविधियों का अवसर देना है।

ताड़ोबा के क्षेत्र संचालक डॉ. प्रभु नाथ शुक्ल की संकल्पना से शुरू इस योजना के तहत अब तक 6 गांवों में तारू उद्यान तैयार किए जा चुके हैं। बफर क्षेत्र के कुल 95 गांवों में चरणबद्ध तरीके से ऐसे उद्यान विकसित करने की योजना है। इनका निर्माण ताड़ोबा फाउंडेशन, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड और अन्य स्रोतों के सहयोग से किया जा रहा है।

सुरक्षित माहौल और सुविधाएं: प्रत्येक तारू उद्यान लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जिसे मजबूत तार की फेंसिंग से घेरा गया है ताकि कोई भी वन्यजीव अंदर प्रवेश न कर सके। यहां बच्चों के लिए खेल सामग्री, बुजुर्गों के लिए बैठने की व्यवस्था और सभी के लिए वॉकिंग ट्रैक बनाए गए हैं। साथ ही पर्यावरण और वन्यजीवों से संबंधित जानकारी देने वाले बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ेगी। उद्यानों को फूल-पौधों से सजाया गया है और मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था भी की गई है।

तारू सैनिक निभाएंगे जिम्मेदारी: इन उद्यानों के रखरखाव की जिम्मेदारी वन वि:भाग के पास रहेगी, लेकिन नियमित देखभाल और सुरक्षा के लिए प्रत्येक गांव से 4-5 लोगों को तारू सैनिक” के रूप में नियुक्त किया गया है। ये स्थानीय लोग उद्यान की स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, जिससे ग्रामीणों की सहभागिता भी बनी रहेगी।

स्थानीय आस्था से जुड़ा नाम : तारू उद्यान नाम स्थानीय गोंड जनजाति की आस्था से जुड़ा हुआ है। ताड़ोबा क्षेत्र का नाम भी ‘तारू’ देवता के नाम पर पड़ा है, जिनका मंदिर ताड़ोबा झील के किनारे स्थित है। इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए उद्यानों का नाम रखा गया है, ताकि ग्रामीण इस पहल से भावनात्मक रूप से भी जुड़ सकें। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान मिला है, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद भी बढ़ी है।

चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार : अब तक 6 गांवों में उद्यान तैयार किए जा चुके हैं और आने वाले समय में सभी 95 गांवों में ऐसे उद्यान विकसित करने की योजना है। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान मिलेगा, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आएगा। डॉ. प्रभु नाथ शुक्ल, क्षेत्र संचालक, ताड़ोबा-अंधारी बाघ प्रकल्प चंद्रपुर

Created On :   23 April 2026 4:29 PM IST

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