Jabalpur News: पहले से मौजूद है टेलीकॉम का ईकोसिस्टम, सही इस्तेमाल से हो सकता है 50 हजार लोगों को लाभ

पहले से मौजूद है टेलीकॉम का ईकोसिस्टम, सही इस्तेमाल से हो सकता है 50 हजार लोगों को लाभ
टेलीफोन मैन्युफैक्चरिंग जोन: शहर इसके लिए सबसे परफेक्ट, बस एक साथ समायोजन की जरूरत

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। बीते दौर में टेलीकम्युनिकेशन का हब रहा शहर आज भी इसी क्षेत्र में हजारों लोगों को रोजगार देने की क्षमता रखता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर टेलीकाॅम सेक्टर में पहले से मौजूद ईको और सपोर्ट सिस्टम का उपयाेग सटीक तरीके से हो तो शहर में ही 50 हजार लोगों को लाभ मिल सकता है। दो बड़ी टेलीकॉम फैक्ट्रियां, पुराने प्रशासनिक भवन, लैब, ट्रेनिंग सेंटर इसके साथ ही डिफेंस गठजोड़ बने, इसमें ट्रिपलआईटीडीएम जैसे संस्थान का सहयोग मिले तो यह सब नई इकाइयों के खुलने में एक बड़े सपोर्ट सिस्टम का काम करेंगे।

इनके सहयोग से अलग-अलग तरह की टेलीकाॅम निर्माण इकाइयां शुरू होने में करीब 10 हजार लोग रोजगार से जुड़ेंगे और इनसे 50 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा। जानकारों का कहना है कि जब टेलीकॉम की फैक्ट्रियां जबलपुर में पूरी ताकत से उत्पादन करती थीं तो इनमें उस वक्त 10 हजार लोग काम करते थे। इतने कर्मचारी, टेक्नीशियन, इंजीनियर उस वक्त कोलकाता की फैक्ट्री में भी नहीं थे।

यहीं से संचालित होती थीं पूरी फैक्ट्रियां

जबलपुर में टेलीकाॅम सेक्टर में काम कर चुके एक्सपर्ट का कहना है कि जब रानीताल, रिछाई टेलीकाॅम फैक्ट्री में पूरा उत्पादन होता था तो उस वक्त टेलीकॉम उत्पादन इकाइयों का चीफ जनरल मैनेजर राइट टाउन, रानीताल में बैठता था। टेलीकॉम फैक्ट्रियों का मुख्यालय जबलपुर में ही था।

तीन चीफ मैनेजर जबलपुर में वर्क करते थे। इनमें एक जो यूनिट में प्रोडक्शन होता है उसकी माॅनीटरिंग और प्रबंधन करता था, दूसरा तकनीकी, क्वालिटी एश्योरेंस पर वर्क करता था और तीसरा अभी जो रिज रोड में टेलीकाॅम ट्रेनिंग सेंटर है उसका मुखिया था। इस तरह टेलीकाॅम सेक्टर में उत्पादन, गुणवत्ता, ट्रेनिंग सब की जिम्मेदारी जबलपुर की थी।

इस तरह की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां खुल सकती हैं

जानकारों का कहना है कि टेलीकॉम क्लस्टर बनाने से यहां 5 जी, 6जी नेटवर्क से संबंधित उपकरणों का निर्माण किया जा सकता है। इसी तरह नेटवर्किंग इक्विपमेंट, राउटर, स्विच, ट्रांसमिशन उपकरण एवं अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर का निर्माण यहां आसानी से किया जा सकता है। ऑप्टिकल फाइबर केबल, फाइबर टर्मिनेशन एवं नेटवर्किंग उपकरणों का निर्माण और टेस्टिंग या परीक्षण केन्द्र बनाये जा सकते हैं।

संचार तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्क तथा स्मार्ट कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के निर्माण की इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं। इनके लिए केवल केन्द्र और राज्य के सहयोग की जरूरत है। जबलपुर की भौगोलिक स्थिति भी बेहतर है, हर तरह की कनेक्टिविटी का फायदा भी मिल सकता है।

Created On :   10 Aug 2026 7:08 PM IST

Tags

Next Story