किफायती करिश्मा: हजारों की सर्जरी अब 100 रुपए से भी कम में, ब्रेस्ट कैंसर के ऑपरेशन के बाद बांह में सूजन के चांस नहीं

हजारों की सर्जरी अब 100 रुपए से भी कम में, ब्रेस्ट कैंसर के ऑपरेशन के बाद बांह में सूजन के चांस नहीं
मंडे पॉजिटिव } सेंट्रल इंडिया का पहला और देश का 5वां शासकीय संस्थान बना एनएससीबी मेडिकल कॉलेज

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र से मध्य भारत के लिए सकारात्मक खबर सामने आई है। जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए अत्याधुनिक माइक्रोसर्जिकल तकनीक S-LYMPHA का सफल प्रयोग शुरू किया गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह सेंट्रल इंडिया का पहला तथा देश के शीर्ष 5 शासकीय चिकित्सा संस्थानों में से एक बन गया है। मेडिकल कॉलेज की यह पहल हजारों ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर्स के चेहरे पर एक नई मुस्कान और बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर आई है।

क्या है यह तकनीक और क्यों है खास?

{ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी, विशेषकर ऑग्जीलरी लिम्फ नोड डिसेक्शन के बाद अधिकांश मरीजों की बांह में अधिक सूजन आने (जिसे लिम्फीडेमा कहा जाता है) का खतरा बना रहता है।

{इससे मरीजों को जीवनभर हाथ में दर्द और भारीपन सहना पड़ता है।

{इस तकनीक के तहत डॉक्टर अत्यंत सूक्ष्म लिम्फेटिक नलिकाओं की पहचान करते हैं।

{इन नलिकाओं को पास की ही छोटी नस से जोड़ दिया जाता है।

{इससे बांह में लिम्फ का बहाव सुचारू रहता है और सूजन का खतरा न के बराबर हो जाता है।

टीमवर्क से मिली सफलता

इस उपलब्धि में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा के साथ-साथ सर्जरी विभाग के ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टिक सर्जन डॉ. यादव के साथ प्लास्टिक सर्जरी विभाग से डॉ. पवन अग्रवाल, डॉ. प्रशांत यादव, डॉ. राजीव कुकरेले और यूनिट-4 टीम, प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट और एनेस्थीसिया टीम का उत्कृष्ट समन्वय व सहयोग रहा।

वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट, खर्चा सीमित

सर्जरी विभाग के ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टिक सर्जन डॉ. संजय यादव ने बताया कि सामान्यतः देश-विदेश के बड़े कॉर्पोरेट और निजी अस्पतालों में इस तकनीक के दौरान उपयोग होने वाली आईसीजी डाई के कारण केवल सामग्री अथवा कंज्यूमेबल का खर्च ही 50 हजार से अधिक आ जाता है, लेकिन हमारी टीम ने इसका एक बेहतरीन, किफायती और अभिनव विकल्प खोज निकाला।

जिसमें लो कॉस्ट फ्लोरोसिएन सोडियम डाई टेक्निक का उपयोग कर इस प्रक्रिया की कंज्यूमेबल लागत को 100 रुपए से भी कम में सीमित करने में सफलता पाई है। यह तकनीक दर्शाती है कि अत्याधुनिक विश्वस्तरीय इलाज और कम खर्च साथ-साथ चल सकते हैं।

Created On :   10 Aug 2026 6:56 PM IST

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