मैन्युफैक्चरिंग जोन का मामला: टेलीकॉम सेक्टर को लेकर शहर में हर तरह की अनुकूलता, पहले से मौजूद हैं संसाधन

टेलीकॉम सेक्टर को लेकर शहर में हर तरह की अनुकूलता, पहले से मौजूद हैं संसाधन
84 साल पहले का बना इन्फ्रास्ट्रक्चर, देश भर में मजबूत नेटवर्क पर्याप्त जमीन भी मौजूद तो फिर शहर को प्राथमिकता क्यों नहीं..?

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। ग्वालियर में साढ़े तीन हजार करोड़ की लागत से टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की घोषणा ने शहर के प्रबुद्ध वर्ग के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि किसी भी शहर में किसी भी सेक्टर से जुड़े बड़े उद्योग की स्थापना में सबसे पहले जमीन की जरूरत पड़ती है। इसके बाद उसके संचालन के लिए कार्यालय और अन्य संरचनाओं में बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।

सबसे अहम बात यह है कि जबलपुर में टेलीकॉम के क्षेत्र में ये सभी चीजें पहले से उपलब्ध हैं। करीब 84 साल पहले अंग्रेजों के जमाने की बनी पूरी अधाेसंरचना यहां मौजूद है। यहां स्थापित कार्यालयों व संस्थानों की पहले से ही पूरे देश में कनेक्टिविटी है। अंग्रेजों के समय से इसका इस्तेमाल भी होता चला आ रहा है तो जबलपुर के मृतप्राय हो चुके टेलीकॉम सेक्टर को जीवंत क्यों नहीं किया जा रहा है? एक नई संरचना में करोड़ों खर्च करने का आखिर क्या औचित्य है। नागरिकों का कहना है कि इसके लिए शहर के जनप्रतिनिधियों को पुरजोर ढंग से आवाज उठानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि जबलपुर के रिछाई औद्योगिक क्षेत्र व रानीताल टेलीग्राफ में बड़े रकबे की जमीन मौजूद है। सभी कार्यालयों को मिलाकर यहां टेलीकॉम से जुड़े 7 संस्थान दशकों पूर्व से संचालित हैं। डिफेंस के कारण अंग्रेजों के समय से ही जबलपुर दूरसंचार माध्यम का एक मुख्य केन्द्र रहा। टेलीकॉम के मामले में देश का हर प्रमुख शहर जबलपुर से पहले से ही जुड़ा हुआ है। यानी कि सब कुछ पहले से ही बना बनाया है।

लोगों का कहना है कि ग्वालियर में टेलीकाॅम जोन बनाने के लिए 170 एकड़ जमीन की तलाश की जाएगी। करार के बाद सरकार तलाशकर यह जमीन देगी, जबकि जबलपुर में ऐसे प्रयासों से गुजरना ही नहीं पड़ेगा। शहर में 24 घंटे बिजली, पानी, एयर कनेक्टिविटी, 4 हाईवे से सीधा जुड़ाव जैसे अन्य सकारात्मक पहलू और हैं जिससे सीधे यूनिट लगाने वाले को सहूलियत मिलेगी। इन सबके मद्देनजर जबलपुर को प्राथमिकता देनी चाहिए।

क्लस्टर एवं सेमीकंडक्टर चिप निर्माण सेंटर बनाया जाए

इधर फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हिमांशु खरे का कहना है कि भूमि, परिसंपत्ति के पहले से मौजूदगी के साथ आधुनिक टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए। जबलपुर की टेलीकॉम फैक्ट्री का पुनरुद्धार एक बड़े औद्योगिक अवसर के रूप में किया जा सकता है। फेडरेशन के आशीष सक्सेना, कमल ग्रोवर, बलदीप मैनी, अरुण पवार, अशोक कपूर आदि ने कहा कि जबलपुर में पहले से ही टेलीकॉम क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है तथा ऐसे में बंद पड़ी टेलीकॉम फैक्ट्री को इस पूरे इकोसिस्टम का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सकता है।

सन् 1942 में अंग्रेजों ने समझी थी महत्ता

जानकारों का कहना है कि 1942 में यानी 84 साल पहले जबलपुर के महत्व काे अंग्रेज शासन ने समझा और यहां पर काेलकाता से लाकर टेलीग्राफ फैक्ट्री को स्थापित किया। इसको कुछ सालों तक टेलीग्राफ यूनिट के रूप में चलाया और फिर बाद में टेलीकाॅम फैक्ट्री नाम दिया गया। यहां पर एक दर्जन से ज्यादा टेलीकाॅम प्रोडक्शन होता रहा। कुछ सालों में लेकिन अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में ध्यान न देने से पूरे महाकौशल एरिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। जानकारों का कहना है कि अभी यदि जबलपुर की रानीताल 69, रिछाई 32 एकड़ में बनी टेलीकाॅम इकाइयों को फिर से अपग्रेड किया जाए तो लाखों परिवारों का इसमें भला हो सकता है।

ये उपकरण बन सकते हैं

{टेलीकॉम क्लस्टर बनाने से यहां 5 जी/6 जी नेटवर्क से संबंधित उपकरण बन सकते हैं

{नेटवर्किंग इक्विपमेंट, राउटर, स्विच, ट्रांसमिशन उपकरण एवं अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर का निर्माण

{ऑप्टिकल फाइबर केबल, फाइबर टर्मिनेशन एवं नेटवर्किंग उपकरणों का निर्माण और परीक्षण केन्द्र

{संचार तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्क तथा स्मार्ट कम्युनिकेशन सिस्टम।

{इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के निर्माण की इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं। इस सेक्टर को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।

Created On :   8 Aug 2026 5:50 PM IST

Tags

Next Story