Jabalpur News: टेलीकॉम-इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का इन्फ्रास्ट्रक्चर यहां पहले से मौजूद, इसका लाभ पूरे महाकौशल को मिले

टेलीकॉम-इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का इन्फ्रास्ट्रक्चर यहां पहले से मौजूद, इसका लाभ पूरे महाकौशल को मिले
  • ग्वालियर में तलाशनी पड़ेगी जमीन लेकिन यहां खाली पड़ी, शहर में विकसित हो सकता है इंटीग्रेटेड टेलीकाॅम टेक्नोलाॅजी का ईको सिस्टम
  • बस सक्रिय और ईमानदार प्रयासों की अहम जरूरत

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। शहर में टेलीकाॅम-इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की यूनिटों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। सबसे ज्यादा जरूरी है ऐसी जमीन कि जहां पर सेमी कंडक्टर के 5जी, 6जी उपकरणों के लिए इकाइयां बनाई जा सकें। ऐसी सभी इकाइयों के लिए जबलपुर में सबसे बेहतर हिस्सों में भूमि उपलब्ध है। इसमें किसी भी तरह से राजस्व का पेंच नहीं और इकाइयां कुछ समय में ही उत्पादन तक शुरू कर सकती हैं।

एक्सपर्ट का मानना है कि शहर में इंटीग्रेटेड टेलीकाॅम टेक्नोलाॅजी के लिए पहले से ईको सिस्टम मौजूद है। इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत और मशक्कत की जरूरत नहीं पड़ने वाली। राज्य सरकार ऐसी इकाइयों के लिए ग्वालियर में अब 170 एकड़ जमीन तलाश कर देगी, जबकि जबलपुर में टेलीकाॅम विभाग के पास पहले से 155 एकड़ के करीब भूमि खाली पड़ी है।

ऐसी बेशकीमती भूमि का उपयोग माॅडर्न टेलीकाॅम फैक्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए किया जाता है, तो पूरे बड़े एरिया को फायदा मिलेगा। जानकारों का यह भी कहना है कि केवल ग्वालियर में टेलीकॉम सेक्टर के सभी तरह के उद्योग न लगाकर इसमें जबलपुर की भी हिस्सेदारी तय की जाए तो औद्योगिक बैलेंस भी बना रहेगा।

इस बार अपग्रेडेशन का फायदा किसी और हिस्से को

शहर में 1942 में 84 साल पहले टेलीग्राफ फैक्ट्री राइट टाउन रानीताल में खोली गई। इसके बाद में 1968 यानी 58 साल बाद अपग्रेड कर इसकाे टेलीकॉम फैक्ट्री का नाम दिया गया। यह अपग्रेडेशन उस वक्त के हिसाब से किया गया। इसमें टेलीफोन एक्सचेंज, टेलीफोन वायर, केबल लाइन, जैक यूनिट, खंभे, टाॅवर एक्सचेंज कार्ड की रिपेयरिंग जैसे वर्क होते थे। जब यह वर्क या यूनिट वक्त के साथ पुरानी हुई, तब मामला डिजिटल 5जी, 6जी सेमी कंडक्टर तक पहुंचा, तो जबलपुर के हिस्से में जो यूनिट आनी थी वह अब कहीं और लगाने की तैयारी में है।

4 हाईवे से सीधे कनेक्टिविटी

ग्वालियर में टेलीकाॅम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित करने के प्लान का कारण बताया जा रहा है कि दिल्ली, आगरा से सीधे कनेक्टिविटी है। वहीं जबलपुर में इसी तरह की कनेक्टिविटी पहले से ही है। शहर सीधे 4 हाईवे से जुड़ा है। इसमें सड़क, रेल नेटवर्क और अब हवाई नेटवर्क भी चंबल एरिया से ज्यादा बेहतर स्थितियों में हैं। यहां कनेक्टिविटी के कारण उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं अपार हैं।

इकाइयां लगाना आसान

शहर में इस सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि टेलीकॉम उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन एक ही स्थान पर विकसित की जा सकती है। यहां प्रोड्क्ट डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट तक की पूरी प्रक्रिया अपग्रेड के लायक है। जानकारों का कहना है कि कंपनियों को अलग-अलग शहरों में डिजाइन, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की सुविधाओं के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही जगह पर पूरी व्यवस्था मिलने से उत्पादन शुरू करने में समय भी कम लगेगा।

Created On :   7 Aug 2026 6:58 PM IST

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