जबलपुर न्यूज: फर्मंटेड ऑर्गनिक खाद से इंसानों के स्वास्थ्य को सुधारा जा सकता है

डिजिटल डेस्क जबलपुर
तरह-तरह की बीमारियों से बचने के िलए हमें न केवल अपनी जीवन शैली में सुधार करना होगा बल्कि खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए खेतों से शुरुआत की जरूरत है। सबसे पहले हमें फर्मंटेड आर्गनिक खाद का उपयोग करते हुए रसायनिक खाद को दूर करना होगा। इससे न केवल सब्जियाें, अनाज की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि मिट्टी में भी सुधार होगा। भूमिगत जल दूषित होने से बचेगा और आम इंसान कई बीमारियाें से दूर हो जाएंगे।
उपरोक्त विचार भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के सस्य विज्ञान संभाग द्वारा भारत में प्रमुख फसल प्रणालियों की उत्पादकता को स्थायी रूप से बढ़ाने एवं पर्यावरणीय पदचिह्नों को कम करने हेतु किण्वित जैविक खादों का मूल्यांकन, प्रचार-प्रसार एवं विस्तार के अंतर्गत ग्राम अमनाला-खमरिया में आयोजित किसान गोष्ठी में विशेषज्ञों ने व्यक्त िकए। गोष्ठी में लगभग 200 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में किण्वित जैविक खाद ,मृदा स्वास्थ्य, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर किसानों को वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई। डॉ एसएस राठौर, समन्वयक एवं प्रमुख सस्य विज्ञान संभाग आईसीएआरआईएआरआई ने किण्वित जैविक खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का महत्वपूर्ण घटक बताया। उन्होंने मृदा की उर्वरता बनाए रखने तथा कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने के लिए जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। डॉ सुभाष बाबू वरिष्ठ वैज्ञानिक ने परियोजना के उद्देश्यों एवं प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ विशाल त्यागी वैज्ञानिक ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उपयोगिता पर चर्चा की।
डॉ अर्जुन सिंह वैज्ञानिक ने मृदा परीक्षण के महत्व एवं वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूने एकत्र करने की विधि समझाई। गोष्ठी में डॉ आनंद विश्वकर्मा परियोजना समन्वयक अखिल भारतीय समन्वित तिल एवं रामतिल अनुसंधान परियोजना ,डॉ अमित झा खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ,कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों तथा राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया।
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