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Jabalpur News: जनरेशन काॅस्ट कम फिर भी बिजली उपभोक्ताओं को राहत नहीं

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। प्रदेश में जनरेशन काॅस्ट कम होने के बाद भी बिजली उपभोक्ताओं को राहत नहीं है। ऊपर से अनेक टैक्स लगाकर वितरण कंपनियां बिजली बिलों में इसे जोड़कर उपभोक्ताओं के यहां भेज रही है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवार के सदस्यों को राहत नहीं मिल रही और लगातार उन्हें महंगाई के बोझ में दबना पड़ रहा है। बताया जाता है कि जीएसटी व सेस में हुए बदलाव से कोयले की प्रभावी लागत में 260 से 291 रुपए प्रति टन की बड़ी कमी आई है, जिससे बिजली उत्पादन में जनरेशन कंपनी को 17 से 25 पैसे प्रति यूनिट की सीधी बचत हो रही है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को एक पैसे तक की राहत बिजली कंपनियां ने नहीं दे रही हैं। इसके पीछे हर बार बढ़ता वित्तीय घाटा, पुराने बुनियादी ढांचे के रख-रखाव का खर्च बताकर वितरण कंपनियों के जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
लाइन लॉस का भार उपभोक्ताओं पर - जानकारों का कहना है कि प्रदेश में 20 से 25 प्रतिशत से अधिक लाइन लॉस है, जो बिजली चोरी होती है या वेस्ट जाती है, उसका आर्थिक नुकसान भी ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं के ऊपर नियामक संपत्तियों और अतिरिक्त शुल्कों के रूप में मढ़ दिया जाता है।
दर घटाने की बजाय बढ़ाने की लगाई याचिका- बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन लागत कम होने के बाद डिस्कॉम्स को बिजली दरें घटानी चाहिए थीं, लेकिन इसके उलट मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष के लिए 6,044 करोड़ के भारी टैरिफ बढ़ोत्तरी की मांग रख दी है। टैक्स से होने वाली बचत को आम जनता तक पहुंचाने की बजाय कंपनियां इसका उपयोग अपने पुराने वित्तीय घाटों को पाटने में कर रही हैं।
इस तरह हो रही वसूली
बिजली कंपनियों के द्वारा उपभोक्ताओं से फिक्स्ड चार्ज, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (यह राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स जो बिल पर जोड़ा जाता है), ऊर्जा विकास उपकर (राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रति यूनिट लिया जा रहा), विलंब भुगतान (यह नियत तिथि के बाद बिल का भुगतान करने पर अधिभार के रूप में उपभोक्ता से लिया जा रहा), एफपीपीएएस (फ्यूल एंड पाॅवर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज), इसके साथ ही मीटर किराया भी बिजली कंपनियों के द्वारा लिया जा रहा है।
Created On :   1 Oct 2026 5:05 PM IST












