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Jabalpur News: आज होलिका दहन, चंद्रग्रहण के कारण कल की जगह परसों मनाई जाएगी धुरेड़ी

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। इस बार भद्रा योग एवं चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। हालांकि वैदिक विद्वानों ने 2 मार्च को भद्रा के पुच्छकाल में हाेलिका दहन को उपयुक्त माना है, वहीं 3 तारीख को चंद्रग्रहण पड़ रहा है इसलिए 4 मार्च को ही रंगों का पर्व धुरेड़ी मनाया जाएगा।
होलिका दहन केवल परंपरा नहीं, बल्कि धर्मशास्त्रों और मुहूर्त विचार पर आधारित अनुष्ठान है। विभिन्न ग्रंथों जैसे धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु तथा स्कन्द पुराण में इसके नियम बताए गए हैं। पं. रोहित दुबे ने बताया कि पंचांग अनुसार 2 मार्च की रात्रि में भद्रा समाप्त होने के बाद पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च को मिलेगा।
होलिका दहन का मुहूर्त
होलिका दहन का मुहूर्त सुबह 5 बजे से 3 मार्च के सूर्योदय के पूर्व रहेगा। वहीं शाम 5:26 बजे से सुबह 4:59 मिनट तक भद्रा योग रहेगा। जिस काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है, परंतु भद्रा का पुच्छकाल रात्रि 2:32 बजे से प्रारंभ होगा, जिस काल में भी होलिका दहन किया जा सकता है। होलिका दहन की तिथि फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होती है, लेकिन इसका निर्धारण केवल तारीख से नहीं, बल्कि तिथि और भद्रा काल देखकर किया जाता है।
इसलिए 2 मार्च को दहन
पं. सौरभ दुबे के अनुसार शास्त्रों के निर्णय अनुसार ही होलिका दहन करना चाहिए। होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है। पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में विद्यमान होनी चाहिए। यदि दो दिन पूर्णिमा हो, तो जिस दिन रात्रि में पूर्णिमा हो, वही दिन ग्रहण किया जाता है, इसलिए 2 मार्च की रात्रि में ही होलिका दहन किया जाना चाहिए।
इसलिए 4 को मनाई जाएगी धुरेड़ी
होलिका दहन के अगले दिन 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। आचार्य वासुदेव शास्त्री के अनुसार यह ग्रहण ग्रस्त उदितखंड चंद्रग्रहण के रूप में भी दृश्य होगा, क्योंकि चंद्रोदय के समय केवल इसका मोक्ष दृश्य होगा। यह ग्रहण भारत के साथ अन्य देशों में भी दृश्य होगा। भारतीय समयानुसार खंड चंद्रग्रहण का प्रारंभ 3:19 बजे होगा तथा ग्रहण का मोक्ष शाम 6:45 बजे होगा।
3 मार्च को सूर्यास्त शाम 5:48 पर हो रहा है, लगभग 1 घंटे तक यह ग्रहण दिखाई देगा। खंड चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट की है। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5:04 बजे रहेगा। इसका सूतक 3 मार्च को प्रातः 9:40 बजे से प्रारंभ होगा। पं. राजकुमार शर्मा शास्त्री के अनुसार ग्रहण काल में होली का पर्व नहीं मनाया जाता एवं पूर्णिमा तिथि पर भी धुरेड़ी नहीं मनाई जाती है, इस कारण से 4 मार्च को धुरेड़ी होली मनाई जाएगी।
क्षेत्र का निरंतर भ्रमण करें एसडीएम
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सभी अनुविभागीय दंडाधिकारियों को होलिका दहन और होली पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने की मंशा से अपने क्षेत्र में निरंतर भ्रमण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के साथ सतत संपर्क में रहें और उनके साथ क्षेत्र का संयुक्त भ्रमण करें। उन्होंने दहन वाले स्थानों एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने की हिदायत भी अधिकारियों को दी है।
उपलों एवं गोकाष्ठ के उपयोग को प्रोत्साहित करने दिए निर्देश
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ, थाना प्रभारियों एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों को होलिका दहन में लकड़ियों के स्थान पर गोकाष्ठ और गोबर के उपलों के उपयोग को प्रोत्साहित करने निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर श्री सिंह ने अधिकारियों से कहा कि जनसहयोग एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से प्रयास किए जाएं कि होलिका दहन में लकड़ी की जगह उपलों और गोकाष्ठ का प्रयोग हो, पर्यावरण संरक्षण और पानी बचाने के लिए प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों से होगी खेलने के लिए प्रोत्साहित करने कहा है। होलिका दहन करने वाली संस्थाओं का पंजीयन करने के निर्देश दिए हैं।
Created On :   2 March 2026 4:33 PM IST












