Jabalpur News: लोहा-गिट्टी और रेत-सीमेंट अचानक सब महंगा, मकान की लागत बढ़ने से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में संकट गहराया

लोहा-गिट्टी और रेत-सीमेंट अचानक सब महंगा, मकान की लागत बढ़ने से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में संकट गहराया
  • बिल्डिंग मटेरियल में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी, युद्ध का असर या कालाबाजारी, आम हो या खास सब हो रहे प्रभावित
  • ट्रांसपोर्टिंग चार्ज बढ़ने से भी और बिगड़े हालात

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के दुष्परिणाम स्वरूप बनी गैस की किल्लत ने पहले ही आम जनता को बुरी तरह परेशान कर रखा है, वहीं अब बिल्डिंग मटेरियल के महंगा होने से मकान बनाना भी मुश्किल हो गया है। मकान बनाने के लिए उपयोग हाेने वाला लोहा-सीमेंट, गिट्टी-एमसैंड, टाइल्स, प्लाई, पीवीसी पाइप और फिटिंग, वायर जैसी जरूरी सामग्रियों के दाम बीते एक माह के भीतर अचानक 20 से 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं, जिसका असर एक मकान बनाने वाला आम आदमी हो या अपार्टमेंट-काॅलाेनी का निर्माण करने वाले बिल्डर्स सभी पर दिखाई दे रहा है। महंगे हुए बिल्डिंग मटेरियल के पीछे युद्ध का असर है या कालाबाजारी फिलहाल इसको लेकर सभी के अपने तर्क हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बिल्डिंग मटेरियल में 5 से 10 प्रतिशत की और वृद्धि हो सकती है।

रेट बढ़ने से आम आदमी का बजट बिगड़ा

चेरीताल निवासी राजेश गुप्ता ने बताया कि जानकी नगर में उनका पुराना प्लाॅट था, जिसमें नया मकान बनाने के लिए दो माह पूर्व ठेके पर निर्माण कार्य शुरू कराया था। उनका अनुमान था कि मकान बनाने की लागत 7 से 8 लाख रुपए आएगी। राजेश के अनुसार लेकिन बीते एक माह से ठेकेदार द्वारा लगातार उन्हें बिल्डिंग मटेरियल महंगा होने की जानकारी दी गई जिससे उनका बजट बिगड़ गया है।

इसी तरह बिलहरी निवासी सुमेश केवट ने बताया कि उनका पुराना मकान जर्जर हो गया था, मकान के बड़े हिस्से को तोड़कर उन्होंने नया कंस्ट्रक्शन शुरू किया, लेकिन अचानक मटेरियल के रेट बढ़ने के कारण उन्हें काम बंद कराना पड़ गया है।

रेट बढ़ने के कई कारण

लोहा-सीमेंट की कंपनियों की तरफ से अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, लेकिन सीमेंट-लाेहा के स्थानीय डीलरों व गिट्टी के क्रेशर संचालकों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने की आशंका के चलते कंपनियों की तरफ से नए रेट तय किए गए हैं, रेत के दाम अभी तक स्थिर ही हैं, क्योंकि रेत की आपूर्ति जिले की नदियों व जलाशयों से ही हो रही है लेकिन अगले एक-दो माह में इसमें भी बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है। हालांकि इस बात की भी चर्चा है कि युद्ध के हालातों को देखते हुए पहले ही गुपचुप तरीके से रेट बढ़ा दिए गए हैं, जिसमें शासन-प्रशासन को संज्ञान लेकर कार्रवाई करना चाहिए।

कंस्ट्रक्शन साइट्स में भी साफ तौर पर दिखा असर

आम आदमी की तरह अपार्टमेंट और काॅलोनी निर्माण करने वाले बिल्डर व कंस्ट्रक्शन कंपनियों में मटेरियल के महंगे होने का प्रभाव देखा जा सकता है। कई बिल्डरों का कहना है कि उनकी साइट्स में लोगों ने पुराने रेट पर बुकिंग की थी, लेकिन अब मटेरियल महंगा होने के कारण उनके निर्माण कार्य की लागत तो बढ़ गई, लेकिन ग्राहकों से उन्हें पुरानी कीमतें ही मिलेंगी जिससे उनके व्यापार पर बड़ा घाटा होगा। शहर में कई कंस्ट्रक्शन साइट्स तो फिलहाल बंद कर दी गई हैं या आने वाले दिनों में बंद हो सकती हैं।

बिल्डिंग मटेरियल के दाम बढ़ने के कारण मकान निर्माण में काफी कठिनाइयां सामने आ रही हैं। आगामी दिनों में कांच और दूसरे प्रोडक्ट्स पर भी तेजी आने की संभावना है। आम लोग हों या बिल्डर्स सभी का बजट और लागत प्रभावित हो रही है।

राहुल मतानी, आर्किटेक्ट

लुब्रिकेंट, केमिकल, बिजली का बिल, ब्लास्टिंग मटेरियल जैसे क्रेशर के सभी पार्ट्स में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से क्रेशर संचालकों ने जबलपुर में 20 प्रतिशत रेट बढ़ाए हैं, दूसरे िजलों और राज्यों में तो 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

द्वारिका मिश्रा, अध्यक्ष क्रेशर एसोसिएशन

Created On :   9 April 2026 4:40 PM IST

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