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Jabalpur News: दावा था आईटी पार्क बनाने का, बनकर रह गया काॅल सेंटर बीई और बीटेक की डिग्री लेकिन पगार मुश्किल से 10 हजार

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। आईटी सेक्टर में काम करने की इच्छुक फर्मों को व्यवसाय शुरू करने और बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा से बरगी हिल्स में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया आईटी टेक्नो पार्क अपने रास्ते से भटक गया है। आईटी पार्क के वास्तविक स्वरूप और वर्तमान स्थिति के बीच का अंतर आज एक गंभीर चर्चा का विषय बना है।
जिस उद्देश्य के साथ इस पार्क की स्थापना की गई थी, वह केवल कॉल सेंटर तक सीमित होकर रह गया है। योजना के अनुसार जहां 2000 से अधिक आईटी इंजीनियरों को उच्च-स्तरीय तकनीकी रोजगार मिलना था, वहां वास्तविकता इसके उलट है।
बहुत कम युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप काम मिल पाया है। बी.ई. और बी.टेक. जैसी डिग्रियां लेने के बाद भी युवा कॉल सेंटर्स में 8 से 10 हजार रुपये की मामूली पगार पर काम करने को मजबूर हैं। यह न केवल आर्थिक शोषण है, बल्कि बौद्धिक क्षमता का भी नुकसान है।
मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों का अभाव
मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (एमपीएसईडीसी) ने आईटी पार्कों में संस्थानों को भूखंड और स्थान तो आवंटित कर दिए, लेकिन वो क्या कर रहे हैं इसकी मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम डेवलप नहीं किया। इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के बड़े-बड़े दावे धरातल पर नहीं उतर पाए।
इसके बिना एक संपूर्ण 'आईटी इकोसिस्टम' का निर्माण असंभव है। आईटी पार्क को महज 'सर्विस हब' के बजाय 'इनोवेशन हब' बनाने की आवश्यकता है। जब तक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तब तक इंजीनियरों को सही मंच नहीं मिल पाएगा।
सरकार और प्रशासन को केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि उच्च-गुणवत्ता वाली कंपनियों को आकर्षित करने वाली नीतियों पर ध्यान देना होगा ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।
इंजीनियरों को नहीं मिली नौकरी
करीब 63 एकड़ भूमि पर 110 करोड़ रुपयों की लागत से बने आईटी पार्क में 110 विकसित प्लाॅटों पर प्राइवेट कम्पनियों को स्थान दिया गया लेकिन आज 10 साल बाद हालात चिंताजनक है। आईटी पार्क के प्रशासनिक भवन में मात्र 12 कम्पनियों ने काम शुरू किया है और इलेक्ट्राॅनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में करीब 40 कम्पनियों ने आंशिक रूप से कार्य प्रारंभ किया है।
नौकरियां इंजीनियर्स को नहीं मिल रही हैं सिर्फ टेक्नीशियन्स एवं टेलीफोन ऑपरेटरों को नौकरी मिली है। कुछ साॅफ्टवेयर कम्पनियां काम कर रही हैं लेकिन उनके कर्मचारियों के आंकड़े स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इतना जाहिर है कि इंजीनियर्स को यहां जॉब नहीं है।
प्लाॅटों के आवंटन में नियमों का पालन नहीं करने वाली 15 कम्पनियों को नोटिस दिया गया है, 6 कम्पनियों के आवंटन निरस्त भी किए जा चुके हैं। संचालित यूनिटों में कितने इंजीनियर्स को जॉब मिला इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
अजय मलिक, ओआईसी
आईटी पार्क, जबलपुर
Created On :   8 April 2026 5:05 PM IST












