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Jabalpur News: 10 साल बाद भी आईटी पार्क अधूरा, 101 कम्पनियों में से अब तक सिर्फ 58 ने ही शुरू किया कारोबार

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। आईटी पार्क में निर्धारित नियमों व अनुबंध की अनदेखी हो रही है। आलम यह है कि 10 साल में 101 कम्पनियों में से सिर्फ 58 कम्पनियां ही अपना कारोबार शुरू कर पाई हैं। आईटी पार्क में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 101 कंपनियों को रियायती दरों पर भूमि आवंटित की गई थी।
आवंटन की प्रमुख शर्त यह थी कि कंपनियों को तीन वर्ष के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण कर परिचालन शुरू करना होगा। मौके पर वर्तमान स्थिति यह है कि यहां 43 कंपनियां निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी संबंधित निर्माण शुरू नहीं कर पाई हैं।
इसे नीतिगत शर्तों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। सस्ते रेट पर जमीन लेकर उसे खाली छोड़ना न केवल निवेश के उद्देश्यों को बाधित करता है, बल्कि रोजगार के अवसरों को भी रोक रहा है। प्रशासन अब इन डिफाल्टर कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी लीज निरस्त करने पर विचार भी कर रहा है।
कुछ कम्पनियां नियम विरुद्ध तरीके से करती रहीं कार्य
जानकारों का कहना है कि आईटी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को बरगी हिल्स के आईटी पार्क में बेहद रियायत दामों पर जमीन दी गई। उद्देश्य था कि आईटी क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इनमें से कुछ कंपनियां ऐसी निकलीं जिनका आईटी से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था।
मप्र राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (ईडीसी) ने गैर आईटी उद्यम में होने के बावजूद इन फर्मों पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि करोड़ों की सब्सिडी दे डाली। कैग के निरीक्षण में हुए खुलासे के बाद हड़कंप की स्थिति है।
जल्द ही दोषी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई और वसूली शुरू होने वाली है। कैग की वर्ष 2023 की रिपोर्ट में कई तरह की गड़बड़ियां उजागर की गईं। वहीं इस मामले में जानकारी के लिए एमपीएसईडीसी के एमडी आशीष वशिष्ठ से चर्चा की गई तो उन्होंने कैग की रिपोर्ट पर कुछ भी कहने से इंकार किया है।
Created On :   7 April 2026 6:16 PM IST












