Jabalpur News: सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं मानव संसाधन भी मजबूत बने तो सुधरेगा स्वास्थ्य

सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं मानव संसाधन भी मजबूत बने तो सुधरेगा स्वास्थ्य
विश्व स्वास्थ्य दिवस: महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के मरीजों को संजीवनी दे रही संस्कारधानी, उन्नत तकनीकों से बदलेगी उपचार की तस्वीर

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर पूरे महाकौशल क्षेत्र के साथ-साथ विंध्य और बुंदेलखंड के लिए भी एक प्रमुख मेडिकल हब के रूप में उभरकर सामने आई है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज इन क्षेत्रों से यहां पहुंचते हैं। समय के साथ पारंपरिक उपचार पद्धतियों की जगह उन्नत तकनीक का इस्तेमाल अब अनिवार्य हो गया है।

शहर के निजी अस्पतालों में अब रोबोटिक सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का प्रयोग बढ़ रहा है, जिससे मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है। शासकीय अस्पतालों में भी आधुनिक उपचार सुविधाएं बढ़ी हैं। मेडिकल कॉलेज में रिसर्च के साथ कैंसर और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहे हैं, लेकिन एक दूसरा पहलू यह भी है कि बड़े शासकीय अस्पतालों में समय के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत तो हुआ है, लेकिन मानव संसाधन की कमी आज भी बरकरार है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज और उसका सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल वर्तमान में अपनी क्षमता से कहीं अधिक सेवाएं दे रहा है। संजीवनी क्लीनिकों के माध्यम से शहर के हर वार्ड में एक शासकीय स्वास्थ्य केंद्र होने का सपना अभी भी अधूरा है।

विशेषज्ञों के अनुसार जबलपुर पर मरीजों का बढ़ता दबाव विश्वसनीयता का प्रमाण है, लेकिन समय के साथ उन्नत तकनीकों का प्रयोग और मानव संसाधन की उपलब्धता इसका समाधान है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जबलपुर

शहर के प्रमुख शासकीय अस्पतालों की स्थिति पर एक नजर।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल

7 दशक से अधिक पुराने भवनों की जगह नए भवन बनने हैं। अस्पताल के नए भवन का पहले फेज का कार्य करीब 800 करोड़ रुपयों से होगा। बीते तीन वर्षों से औसतन 6 लाख मरीज ओपीडी में आ रहे हैं, वहीं करीब 80 हजार मरीज आईपीडी में पहुंचे। वर्तमान में पुरानी बिल्डिंग में करीब 700 बेड हैं, जो कि नए भवन में बढ़कर 1200 तक पहुंच जाएंगे। हालांकि चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी बरकरार है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन न्यूरोसर्जरी को मिलाकर 295 बेड हैं, लेकिन यहां औसतन 350 मरीज भर्ती रहते हैं। ओपीडी में रोजाना 350 से 550 मरीज आते हैं। पिछले 6 वर्षों में मरीजों के दबाव में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई है। अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट और कैडवरिक अंगदान जैसी जटिल सुविधाएं उपलब्ध हैं। हाल ही में इसके विस्तार पर मुहर लगी है।

स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट | कैंसर पेंशेंट अत्याधुनिक इलाज से आज भी वंचित हैं। इलाज में महत्वपूर्ण रेडिएशन थैरेपी के लिए कोबाल्ट मशीन पर ही निर्भर हैं, जबकि यहां अत्याधुनिक लीनियर मशीन भी लगाई जानी थी। यहां बोनमैराे ट्रांसप्लांट यूनिट में अब तक 9 ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, लेकिन उपकरणों के अभाव में वयस्कों का ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा है।

एल्गिन अस्पताल| अस्पताल के विस्तार के लिए नर्सिंग हॉस्टल को तोड़ने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। यहां 100 बेड की क्षमता वाले नए भवन का निर्माण होना है। एल्गिन में 122 बेड स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में करीब 230 बेड पर मरीज भर्ती होते हैं। रोजाना करीब 400 मरीज ओपीडी में आते हैं और करीब 40 मरीज भर्ती होते हैं।

रांझी अस्पताल | सिविल अस्पताल के रूप में उन्नयन का कार्य करीब 44 करोड़ रुपयों की लागत से हो रहा है, जिसके बाद 50 बेड की क्षमता वाला यह स्वास्थ्य केंद्र 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल के रूप में परिवर्तित हो जाएगा। कार्य की सुस्त गति मरीजों का इंतजार बढ़ा रही है। अस्पताल में रोजाना करीब 300 मरीज उपचार के लिए आते हैं।

एक नजर

- शासकीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, एल्गिन अस्पताल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लीनिक और आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं।

- निजी स्तर पर बड़े-छोटे मिलाकर 150 से ज्यादा निजी अस्पताल चल रहे हैं।

- इसी तरह 400 से ज्यादा निजी क्लीनिक पंजीकृत हैं।

Created On :   7 April 2026 6:33 PM IST

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story