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Jabalpur News: आधुनिक टेलीकॉम क्लस्टर का असली हकदार है हमारा शहर

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। जबलपुर से पूरे देश का टेलीकाॅम सेक्टर पहले कन्ट्रोल किया जाता था। उत्पादन इकाइयों के लिए नीति यहीं पर बनती थी। जो उपकरण फैक्ट्रियों में बनते थे उनकी जांच परख गुणवत्ता निर्धारण का प्रमाण दिया जाता था। इसी के साथ दूर संचार क्षेत्र में जो नये-नये बदलाव सामने आए उनके लिए एक्सपर्ट को और अधिक ट्रेंड करने की जिम्मेदारी शहर की थी।
देश के 4 चीफ जनरल मैनेजर यहां से पूरे देश की टेलीकाॅम नीति को कमांड करते थे, लेकिन इसी शहर में अब यह सेक्टर डूबने की कगार पर है। लोगों का कहना है कि तमाम तरह की अनदेखी, खामियां और बीते सालों में सरकार की जो नीतियां रही हैं, उसके बावजूद भी टेलीकाॅम क्लस्टर, बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का असली हकदार हमारा शहर है। इसको लेकर अनेक संगठनों ने अपनी आवाज को बुलंद करना शुरू कर दिया है।
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर को फिर जिंदा करने वे उचित मंच पर अपनी आवाज उठाएंगे। इसी के साथ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपाण्डे ने कहा कि टेलीकाॅम जोन हर हाल में हमारे शहर में ही बनना चाहिए। जबलपुर में टेलीकॉम क्लस्टर एवं सेमीकंडक्टर हब जैसी पहल मध्यप्रदेश को नई तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जा सकती है।
शहर में यूनिट खुलें: मुख्य सचिव को दिए नीतिगत सुझाव
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को भोपाल में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई से मुलाकात कर जबलपुर को टेलीकाॅम, इलेक्ट्राॅनिक, सेमीकंडक्टर एवं टेक्नाेलाॅजी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने हेतु नीतिगत सुझाव दिए।
फेडरेशन के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि वर्तमान समय में देश में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम उपकरण, सेमीकंडक्टर एवं उन्नत तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी नीति के तहत जबलपुर में भी ऐसे बड़े उद्योगों की जल्द स्थापना हो।
सभी कुछ तो है यहां: सेंटर विकसित करने किया जाए अध्ययन
प्रतिनिधियों ने कहा कि जबलपुर में टेलीकॉम सेक्टर को लेकर पूरा इन्फ्राॅस्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। रानीताल टेलीकॉम फैक्ट्री परिसर में मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जाए। यहां 5-जी, 6-जी नेटवर्क उपकरण, राउटर, स्विच, ट्रांसमिशन उपकरण, नेटवर्किंग हार्डवेयर एवं अन्य संचार उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके तथा परिसर में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्राॅनिक्स टेक्नाेलाॅजी सेन्टर विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। यहां सेमीकंडक्टर से संबंधित विनिर्माण, परीक्षण एवं पैकेजिंग तथा अन्य उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स गतिविधियों के लिए उद्योगों को आकर्षित किया जा सकता है।
न हो जबलपुर की उपेक्षा, सभी को मिले लाभ- इधर महाकौशल उद्योग संघ के प्रतिनिधियों ने भोपाल में सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के सचिव जॉन िकग्सली, उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार से जबलपुर के औद्योगिक विकास को लेकर अनेक मांगें रखीं। संघ के डीआर जेसवानी, अतुल गुप्ता, अशोक परयानी, प्रवीण शर्मा, भानु शुक्ला, एनके श्रीवास्तव, लघु उद्योग भारती के मनीष पटेल आदि ने कहा कि टेलीकाॅम रिछाई की खाली पड़ी भूमि का सही उपयोग हो। बने बनाए इन्फ्रास्ट्रक्चर को तहस-नहस करने की बजाय इसे विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके। शहर की उपेक्षा ठीक नहीं है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी पीपी, इन्वेस्टमेंट माॅडल
श्री खरे ने मुख्य सचिव को सुझाव देते हुए कहा कि जबलपुर की रक्षा उत्पादन से जुड़ी मजबूत औद्योगिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस क्लस्टर में डिफेंस, इलेक्ट्राॅनिक्स, कम्युनिकेशन एवं सर्विलांस इक्विपमेंट के निर्माण की इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे स्थानीय एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन से जोड़ने के अवसर भी प्राप्त होंगे। निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए पीपी, इन्वेस्टमेंट माॅडल तैयार किया जाए।
शासन और प्रशासकीय स्तर पर चर्चा जल्द
चैंबर्स के सुझाव पर अतिरिक्त मुख्य सचिव एमएसएमई नीरज मंडलोई ने फेडरेशन को आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही इस ओर शासन तथा प्रशासकीय स्तर पर चर्चा करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के संयुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र पोरवाल, योगेश गोयल, जयदेव ताम्रकर, अशोक आनंद, राजीव जैन, प्रवीण आचार्य, डॉ. सुरेंद्र सिंह तथा राजेश हिरवे उपस्थित थे।
Created On :   12 Aug 2026 5:05 PM IST











