बैठक में फैसला: शैक्षणिक सत्र 2030-31 तक नए फार्मेसी बीफार्मा - डीफार्मा कॉलेजों पर रोक, कॉलेजों को दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को देनी होगी फीस की पूरी जानकारी

शैक्षणिक सत्र 2030-31 तक नए फार्मेसी बीफार्मा - डीफार्मा कॉलेजों पर रोक, कॉलेजों को दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को देनी होगी फीस की पूरी जानकारी
  • राज्य उच्च शिक्षा व विकास आयोग की बैठक में फैसला
  • आदिवासी और पहाड़ी जिलों में 17 नए व्यावसायिक कॉलेजों को भी मंजूरी
  • राज्य उच्च शिक्षा व विकास आयोग की बैठक में फैसला
  • सहूलियत लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अब सामान्य सीट पर नहीं कर सकेंगे दावा

Mumbai News. राज्य में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से 2030-21 के बीच किसी भी नए बैचलर ऑफ फार्मेसी या डिप्लोमा इन फार्मेसी कॉलेजों को मंजूरी नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में गुरुवार को राज्य उच्च शिक्षा व विकास आयोग की मंत्रालय में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। बड़ी संख्या में खाली रह जाने वाली सीटों और कई संस्थानों की खराब गुणवत्ता के मद्देजर यह फैसला किया गया है। इसके अलावा इस अवधि के दौरान राज्य के मौजूदा शिक्षा संस्थानों की प्रवेश क्षमता बढ़ाने की भी इजाजत नहीं दी जाएगी। बैठक में यह फैसला भी किया गया है कि केंद्र सरकार और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को भी इस बात की जानकारी दी जाएगी कि राज्य में फिलहाल और फॉर्मेसी कॉलेजों की जरूरत नहीं है। दरअसल कई शिक्षा संस्थान सीधे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से मंजूरी लेकर आते थे जिसके बाद राज्य सरकार को भी मंजूरी देनी पड़ती थी लेकिन अब राज्य सरकार इसे लेकर सख्ती बरतने की तैयारी में है। बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान राज्य में 531 कॉलेजों में बीफार्मा की 46109 में के करीब 17 हजार यानी 30 फीसदी खाली रह गईं थीं।

आदिवासी और पहाड़ी जिलों में 17 नए व्यावसायिक कॉलेजों को मंजूरी

राज्य के पिछड़े और दुर्गम इलाकों के विद्यार्थियों में कौशल आधारित शिक्षा को गति देने के लिए 17 नए व्यावसायिक कॉलेजों को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि आदिवासी, पहाड़ी और पिछड़े 7 जिलों में इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, एचएमसीटी और बी.वोक पाठ्यक्रमों के कॉलेजों को प्राथमिकता के आधार पर अनुमति दी जाएगी। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ और कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव, उद्योगों की बढ़ती जरूरतों और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए शिक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है। आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

नए कौशल केंद्रों को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के व्यापक विकास प्रारूप को मंजूरी दी गई है। मुंबई, नवी मुंबई, पुणे और नागपुर में उद्योगोन्मुख कौशल आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 61 हजार से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य में नए कौशल केंद्र स्थापित कर युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तकनीकी विश्वविद्यालय का विकास आराखड़ा मंजूर

बैठक में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विश्वविद्यालय के 2025-2031 के व्यापक विकास प्रारूप को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत गड़चिरोली, नंदुरबार, हिंगोली, वाशिम, धाराशिव, सिंधुदुर्ग और परभणी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेजों को प्राथमिकता से अनुमति दी जाएगी। वहीं बी.वोक कॉलेज, आर्किटेक्चर और एचएमसीटी पाठ्यक्रमों के नए संस्थान भी शुरू किए जाएंगे। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रमों को अपडेट करे तथा प्रयोगशालाओं और अनुसंधान के लिए उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाए। छात्रों को इंटर्नशिप, प्रायोगिक प्रशिक्षण और रिसर्च के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

कॉलेजों को निर्देश, दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दें फीस की पूरी जानकारी

उधर उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी मातहत महाविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को फीस संबंधी पूरी और अपडेटेड जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है। हाल ही में महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कक्षा 12वीं का परिणाम घोषित किए जाने के बाद राज्यभर में स्नातक पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया गया है। निर्देशों के अनुसार, महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय अथवा शुल्क नियामक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित और स्वीकृत प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फीस, डेवलपमेंट फीस तथा अन्य सभी शुल्कों की अद्यतन जानकारी कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी। इसके साथ ही प्रवेश शुल्क से जुड़ी संपूर्ण जानकारी कॉलेज की प्रवेश सूचना पुस्तिका (प्रॉस्पेक्टस) में भी अनिवार्य रूप से प्रकाशित करनी होगी। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालयों की होगी कि प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों को प्रवेश से पहले फीस की पूरी जानकारी उपलब्ध हो। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस बोर्ड और प्रवेश पुस्तिका में शुल्क संबंधी जानकारी सही तरीके से प्रदर्शित हो, इसकी निगरानी संबंधित विश्वविद्यालयों और विभागीय सह-निदेशकों द्वारा की जाएगी। सभी विभागीय सह-निदेशकों और राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को अपने अधीनस्थ और संबद्ध महाविद्यालयों को तत्काल इस संबंध में सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय के मुताबिक फीस को लेकर किसी प्रकार की शिकायत उत्पन्न न हो, इसकी जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालयों की होगी। यदि किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित कॉलेज को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

सहूलियत लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अब सामान्य सीट पर नहीं कर सकेंगे दावा

प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु, शैक्षणिक पात्रता, अनुभव, परीक्षा में बैठने के मौके के आधार पर सहूलियतें लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अब सामान्य वर्ग की सीटों पर दावा नहीं कर सकेंगे। ऐसे अभ्यर्थियों की अब आरक्षित सीटों पर ही नियुक्ति हो सकेगी। राज्य मंत्रिमंडल ने विभिन्न सहूलियतों को लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की नीति को मंजूरी प्रदान की है। आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों ने आयु, शैक्षणिक पात्रता, अनुभव, परीक्षा में बैठने के मौके (परीक्षा शुल्क छोड़कर) सरकार की सहूलियतों का लाभ लिया होगा, ऐसे अभ्यर्थियों की गणना अब संबंधित आरक्षित वर्ग में ही की जाएगी। ये अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के पदों पर दावा नहीं कर सकेंगे। जबकि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों ने सरकार की किसी सहूलियतों का लाभ नहीं लिया होगा। ऐसे अभ्यर्थियों को गुणवत्ता के आधार पर सामान्य वर्ग की सीटों पर मौका मिल सकेगा।

Created On :   14 May 2026 10:06 PM IST

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