राजनीति में चर्चा: राकांपा अजित गुट को लगा झटका, आनंद परांजपे ने दिया इस्तीफा, शिवसेना से पुराना रिश्ता फिर मजबूत होने के संकेत

राकांपा अजित गुट को लगा झटका, आनंद परांजपे ने दिया इस्तीफा, शिवसेना से पुराना रिश्ता फिर मजबूत होने के संकेत

Mumbai News. राकांपा (अजित) को ठाणे-कल्याण क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने गुरुवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे) में शामिल हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, परांजपे ने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम, संगठनात्मक बदलाव और विधान परिषद और राज्यसभा में मौका नहीं मिलने से वे नाराज बताए जा रहे थे। कुछ दिन पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी की थी। इसके बाद उनके शिवसेना में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि उस समय परांजपे ने इसे निजी मुलाकात बताते हुए सभी अटकलों को खारिज कर दिया था। लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिल गया है।

-शिवसेना से पुराना रिश्ता फिर मजबूत होने के संकेत

आनंद परांजपे का परिवार पहले शिवसेना (अविभाजित) से जुड़ा रहा है। उनके पिता प्रकाश परांजपे शिवसेना (अविभाजित) के चार बार सांसद रहे। खुद आनंद परांजपे भी 2008 से 2014 के बीच दो बार शिवसेना (अविभाजित) की ओर से सांसद रहे। लेकिन 2013 में उन्होंने शिवसेना (अविभाजित) छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय रेलवे बोर्ड में सदस्य बनने का मौका मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस (अविभाजित) ने उन्हें कल्याण-डोंबिवली सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे शिवसेना (अविभाजित) उम्मीदवार श्रीकांत शिंदे से चुनाव हार गए थे।

-पार्टी में बड़े पद, फिर भी बनी रही नाराजगी

राष्ट्रवादी कांग्रेस (अविभाजित) में रहते हुए परांजपे ने महासचिव और मुख्य प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। पार्टी में टूट के समय उन्होंने अजित पवार का साथ दिया था। इसके बावजूद उन्हें विधान परिषद या राज्यसभा में मौका नहीं मिला, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ती गई। उनके इस्तीफे को ठाणे और कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

Created On :   14 May 2026 10:37 PM IST

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