अदालत: मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में कांग्रेस नेता पवन राजे निंबालकर हत्या के मामले में फैसला 16 जून तक टला

मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में कांग्रेस नेता पवन राजे निंबालकर हत्या के मामले में फैसला 16 जून तक टला
  • अदालत ने सभी आरोपियों को 16 जून को कोर्ट में हाजिर रहने के दिए निर्देश
  • आरोपी पद्मसिंह पाटील और मोहन शुक्ला सेहत खराब होने की वजह से कोर्ट में नहीं हो सके पेश

Mumbai News. विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत में कांग्रेस नेता पवन राजे निंबालकर हत्या के मामले में फैसला 16 जून तक टल गया है। मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटील और मोहन शुक्ला सेहत खराब होने की वजह से अदालत में पेश नहीं हो सके। अदालत ने सभी आरोपियों को अगली तारीख 16 जून को फैसले के दौरान अदालत में हाजिर रहने के निर्देश दिया है। पवनराजे निंबालकर की 3 जून 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई पांच साल बाद शुरू हुई।

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस बात की काफी चर्चा थी, क्योंकि पवनराजे हत्याकांड की सुनवाई का फैसला आने की उम्मीद थी। यह एक संवेदनशील मामला है, क्योंकि मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटील की बहन सुनेत्रा पवार अब महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री हैं। धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर के पिता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की 3 जून 2006 को कलंबोली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि पाटील ने पवनराजे के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के कारण उनकी हत्या की साजिश रची थी।

सीबीआई ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह बाजीराव पाटील सहित 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। अंतिम सुनवाई के दौरान पाटील सहित सात आरोपी अदालत में मौजूद थे। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश एस.आर. नवंदर के समक्ष पूरी हो चुकी है। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार पवनराजे की हत्या के लिए 25 लाख रुपए की ‘सुपारी' (हत्या का ठेका) दी गई थी। शुरू में स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी, जिसे बाद में आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को और उसके बाद सीबीआई को सौंप दिया गया।

इस मामले की सुनवाई पिछले 15 सालों से चल रही है, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित कुल 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इस दौरान एक आरोपी पारसमल जैन मामले में सरकारी गवाह (स्टेट विटनेस) बन गया। इस मुकदमे के लिए उसकी गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल इस मामले में नियमित सुनवाई 4 जुलाई 2011 को शुरू हुई थी और हत्या के ठीक पांच साल बाद सुनवाई शुरू हुई। पूरे 15 साल तक चली एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब फैसला जून में सुनाया जाना तय हुआ है।

Created On :   14 May 2026 9:50 PM IST

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