Mumbai News: शिंदे गुट को मनसे का समर्थन - कल्याण-डोंबिवली में 2019 की कहानी 2026 में दोहराई गई, राजनीति में मचाई हलचल

शिंदे गुट को मनसे का समर्थन -  कल्याण-डोंबिवली में 2019 की कहानी 2026 में दोहराई गई, राजनीति में मचाई हलचल
  • उद्धव ने 2019 में भाजपा से अलग होकर बनाई थी सरकार
  • स्थानीय नेतृत्व ने अपने स्तर पर लिया फैसला- मनसे

Mumbai News. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी करवट ने सभी का ध्यान खींचा है। साल 2019 की विधानसभा चुनाव की कहानी बुधवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) में दोहराती नजर आ रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब फैसला उद्धव ठाकरे का था और अब वही कदम राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने उठाया है। दरअसल केडीएमसी में मनसे ने शिवसेना (शिंदे) को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस स्थिति में अब शिंदे गुट का मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या चुनाव परिणामों के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे के बीच दूरियों की शुरुआत हो चुकी है?

उद्धव ने 2019 में भाजपा से अलग होकर बनाई थी सरकार

साल 2019 में उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन जब चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री पद पर समझौता नहीं किया, तो उद्धव ठाकरे ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया। इसके बाद कांग्रेस और शरद पवार की राकांपा (अविभाजित) के साथ मिलकर महाविकास आघाडी की सरकार बना ली। उस समय इसे राजनीति का बड़ा ‘ट्विस्ट’ माना गया था। अब ठीक ऐसे ही हालात साल 2026 में कल्याण-डोंबिवली मनपा में देखने को मिल रहे हैं। केडीएमसी चुनाव में मनसे ने उद्धव गुट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद मनसे ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने का फैसला कर लिया। इस कदम को उद्धव गुट के लिए बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है।

स्थानीय नेतृत्व ने अपने स्तर पर लिया फैसला- मनसे

मनसे के इस फैसले पर पार्टी नेता संदीप देशपांडे ने सफाई देते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष राज ठाकरे ने स्थानीय नेतृत्व को निर्णय लेने का पूरा अधिकार दिया है। वहां की राजनीतिक स्थिति और गणित को देखते हुए स्थानीय नेताओं ने यह फैसला लिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह फैसला भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए लिया गया है, तो उन्होंने कहा कि संभव है स्थानीय नेतृत्व ने इस दृष्टिकोण से विचार किया हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज ठाकरे इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, क्योंकि अधिकार पहले ही स्थानीय नेताओं को सौंपे जा चुके हैं। देशपांडे ने कहा कि मनसे ने विकास के मुद्दे पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया है। वहीं भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुख नवनाथ बन ने कहा कि मनसे ने शिंदे गुट को समर्थन दिया है, उसका हम स्वागत करते हैं। मनसे हिंदुत्ववादी विचारों वाली पार्टी है। अगर उन्होंने महायुति के विचारों को देखकर समर्थन दिया है तो अच्छा है।

आगे क्या बदलेगा?

केडीएमसी के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती। आने वाले समय में अन्य महानगरपालिकाओं में भी इस तरह के फैसले देखने को मिल सकते हैं। कल्याण-डोंबिवली के बाद अब सभी की नजरें बीएमसी के मेयर पर लग गई हैं।

Created On :   21 Jan 2026 9:26 PM IST

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