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बॉम्बे हाई कोर्ट: मुंबई में झुग्गी-झोपड़ी वालों को दोबारा बसाने और टाउन प्लानिंग में बेहद धीमी प्रगति की किया कड़ी आलोचना

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई में झुग्गी-झोपड़ी वालों को दोबारा बसाने और टाउन प्लानिंग में बेहद धीमी प्रगति की कड़ी आलोचना की। अदालत ने राज्य सरकार को चार हफ्ता के अंदर एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाने और महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट 1971 का ऑडिट करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मुंबई में झुग्गी-झोपड़ियों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए निश्चित रूप से हर इलाके के हिसाब से एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीका अपनाने की जरूरत है। अदालत ने यह फैसला उन कार्रवाइयों के दौरान सुनाया, जिन्हें हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किया था, जिससे इस कानून के जमीनी असर की समीक्षा की जा सके।
न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेथना की पीठ के समक्ष स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान ने मुंबई में झुग्गी-झोपड़ी वालों को दोबारा बसाने और टाउन प्लानिंग में बेहद धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि यह कानून पांच दशकों से भी ज्यादा समय से लागू है। राज्य सरकार एक ऐसी समिति बनाए, जिसमें कानून और उसके लागू होने की पूरी समीक्षा करने के लिए जरूरी और सही विशेषज्ञता हो। इस समिति में शहरी विकास के वरिष्ठ अधिकारी, टाउन प्लानिंग निदेशालय का एक प्रतिनिधि, बिल्डिंग बनाने और टाउन प्लानिंग का अनुभव रखने वाले स्वतंत्र आर्किटेक्ट और ऐसे जन प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए जो खुद आर्किटेक्ट हों और जिन्हें टाउन प्लानिंग का विशेष ज्ञान हो।
पीठ ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि समिति बनने के बाद उसे स्लम एक्ट के कामकाज का ऑडिट करना होगा और अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। वह इस रिपोर्ट पर विचार करें और उसके अनुसार कार्रवाई करे। इस कानूनी व्यवस्था के तहत काम करने वाली सरकारी मशीनरी शहर को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाने की तमाम कोशिशों के बावजूद झुग्गी-झोपड़ियों को खत्म करने में नाकाम रही है।
पीठ ने कहा कि जिन समस्याओं पर चर्चा की गई है, वे निश्चित रूप से मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर से अपेक्षित टाउन प्लानिंग के आदर्शों में बेहद धीमी प्रगति को दर्शाती हैं। जबकि शहर के बड़े हिस्से आज भी झुग्गी-झोपड़ियों के रूप में मौजूद हैं। कोई भी टाउन प्लानिंग जो समय के साथ कदम मिलाकर नहीं चलती, उस पर सवाल उठना लाजमी है। जिन समस्याओं पर चर्चा की गई है, वे निश्चित रूप से मुंबई जैसे अंतर्राष्ट्रीय शहर से अपेक्षित नगर नियोजन के आदर्शों की बेहद निराशाजनक प्रगति को दर्शाती हैं, जब शहर के बड़े हिस्से अभी भी झुग्गी-झोपड़ियों से भरे हैं।
Created On :   8 May 2026 8:57 PM IST
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