बॉम्बे हाई कोर्ट: अदालत के दो फैसले - अवैध रिकॉर्डिंग पर जुर्माना तो दुराचार के आरोपी पुणे के कथित बाबा को जमानत

अदालत के दो फैसले - अवैध रिकॉर्डिंग पर जुर्माना तो दुराचार के आरोपी  पुणे के कथित बाबा को जमानत
  • अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने पर वकील पर 25 हजार और क्लर्क पर 10 हजार रुपये का जुर्माना
  • 4 नाबालिग समेत 5 लड़कियों से दुराचार के आरोपी पुणे के कथित बाबा को 6 साल से अधिक जेल में रहने के बाद जमानत
  • अनधिकृत रिकॉर्डिंग पर मोबाइल जब्त, आरोपी बाबा की जमानत का फैसला लंबी न्यायिक हिरासत और मुकदमे में देरी के आधार पर

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट के दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश सामने आए हैं। एक मामले में अदालत की कार्यवाही की बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर वकील और क्लर्क के खिलाफ जुर्माना लगाया गया तथा मोबाइल जब्त कर लिया गया। दूसरे मामले में 4 नाबालिग समेत 5 लड़कियों से दुराचार के आरोपों का सामना कर रहे पुणे के सोमनाथ कैलास चव्हाण को 6 साल से अधिक समय जेल में बिताने और मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत दी गई।

अदालत की रिकॉर्डिंग पर वकील और क्लर्क पर कार्रवाई

न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और डॉ. नीला गोखले की पीठ के समक्ष झुग्गी पुनर्वास परियोजना से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान क्लर्क विजय जेठमलिया को अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड करते हुए पाया गया। बताया गया कि वह वकील ऋतुपर्ण देव के निर्देश पर रिकॉर्डिंग कर रहे थे। पीठ ने इसे न्यायालय के नियमों का उल्लंघन मानते हुए क्लर्क पर 10 हजार और वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। मोबाइल भी जब्त करने का आदेश दिया गया। जुर्माने की राशि 2 सप्ताह में हाई कोर्ट एम्प्लॉइज मेडिकल वेलफेयर फंड में जमा करनी होगी। पीठ ने भविष्य में ऐसी हरकत दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।

खुद को भगवान का दूत बताने वाले आरोपी को जमानत

दूसरे मामले में न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव की एकल पीठ ने सोमनाथ कैलास चव्हाण की जमानत याचिका मंजूर की। आरोपी पर काला जादू हटाने और छिपा खजाना खोजने का झांसा देकर 4 नाबालिग समेत 5 लड़कियों से दुराचार करने के आरोप हैं। उसके खिलाफ पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून के तहत मामला दर्ज है।

लंबी न्यायिक हिरासत और मुकदमे में देरी का आधार

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी 6 साल से अधिक समय से जेल में है और 28 संभावित गवाहों में से 11 की गवाही पूरी हुई है। पीठ ने पीड़िता के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में विरोधाभास और निकट भविष्य में मुकदमा पूरा होने की संभावना न होने पर विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे का अंतिम फैसला पेश किए गए सबूतों के आधार पर होगा।

Created On :   21 Oct 2026 9:16 PM IST

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