नागपुर खंडपीठ: जानलेवा नायलॉन मांजा पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, ठोस नीति तैयार करने के निर्देश

जानलेवा नायलॉन मांजा पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, ठोस नीति तैयार करने के निर्देश
  • नायलॉन मांजा से होने वाले हादसों को लेकर निर्देश
  • उत्पादन से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक रोक लगाने के लिए ठोस नीति तैयार करने के निर्देश

Nagpur News. नायलॉन मांजा से होने वाले हादसों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने नागपुर और अमरावती के पुलिस आयुक्त तथा मनपा आयुक्तों को अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर नायलॉन मांजा के उत्पादन से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक रोक लगाने के लिए ठोस नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यदि नायलॉन मांजा पड़ोसी राज्यों से इस क्षेत्र में लाया जा रहा है, तो उसकी सीमा पर ही उसके परिवहन को रोकने के उपाय भी नीति में शामिल करने को कहा है।

स्पष्ट नीति हो

स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। पतंगबाजी के दौरान नायलॉन मांजे से पक्षियों के साथ-साथ लोगों के घायल होने और वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं को देखते हुए कोर्ट ने इस मामले में प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मसौदा नीति में नायलॉन मांजा के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग के संबंध में उठाए जाने वाले कदम स्पष्ट होने चाहिए।

तय हो जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश भी दिया है। नीति में नायलॉन मांजे की अवैध आपूर्ति या इस्तेमाल रोकने में विफल रहने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल करना होगा। कोर्ट ने मसौदा नीति अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। न्यायालय मित्र के रूप में एड. निश्चय जाधव ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से एड. एस. एम. उके और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एड. एस. एस. सन्याल ने पक्ष रखा।

जुर्माने से घायलों को मदद

अदालत ने 12 जनवरी 2026 के आदेश में स्पष्ट किया था कि नायलॉन मांजा से गर्दन कटने या वाहन चालकों के साथ हुई दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों के उपचार पर जुर्माने की राशि खर्च की जाएगी, साथ ही निगरानी के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति संबंधित पीड़ित को आर्थिक सहायता देने पर भी विचार करेगी। इस आदेश के बाद खोले गए लोक कल्याण खाते से जनहित के कार्यों के लिए राशि वितरित करने की नीति समिति ने तैयार कर ली है। सुनवाई के दौरान यह जानकारी अदालत को दी गई, जिसके बाद समिति की बैठक की कार्यवाही को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।

Created On :   4 Sept 2026 6:16 PM IST

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