Nagpur News: चांदिवाल आयोग की रिपोर्ट दबाई तो एमपीएससी की न्यायिक जांच पर भरोसा कैसे करें?

चांदिवाल आयोग की रिपोर्ट दबाई तो एमपीएससी की न्यायिक जांच पर भरोसा कैसे करें?
  • पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख का सीएम फडणवीस से सवाल, रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत 4 मांगें रखीं
  • 13 महीने की जांच के बाद सौंपी थी 1400 पन्नों की रिपोर्ट
  • रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए सरकार को 13 और राज्यपाल को 2 बार पत्राचार
  • एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे और जांच की समयसीमा तय करने की मांग

Nagpur News महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और औषध निरीक्षक पेपरलीक मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से घोषित न्यायिक जांच पर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सवाल उठाए हैं। देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पूछा है कि जब न्यायमूर्ति के. यू. चांदिवाल आयोग की 1400 पन्नों की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई, तो एमपीएससी मामले में प्रस्तावित न्यायिक जांच पर विद्यार्थी और जनता भरोसा कैसे करें?

देशमुख ने कहा कि एमपीएससी मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित करने का सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है। लेकिन यह जांच केवल विद्यार्थियों का असंतोष और आंदोलन शांत करने के लिए की जा रही है या सरकार वास्तव में इसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई करेगी, यह स्पष्ट होना चाहिए।

13 महीने की जांच के बाद सौंपी थी 1400 पन्नों की रिपोर्ट

देशमुख के मुताबिक, मार्च 2021 में तत्कालीन राज्य सरकार ने मुंबई हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. यू. चांदिवाल की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था। आयोग ने करीब 13 महीने तक जांच करने के बाद लगभग 1400 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी।

देशमुख का दावा है कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए उन्होंने सरकार से 13 बार और राज्यपाल से 2 बार लिखित पत्राचार किया। इसके बावजूद रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई और न ही इसे विधानसभा के पटल पर रखा गया।

उन्होंने कहा कि यदि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर सरकार ही कार्रवाई नहीं करती और उसे सार्वजनिक भी नहीं किया जाता, तो नई न्यायिक जांच के परिणाम को लेकर विद्यार्थियों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

देशमुख की सरकार से 4 प्रमुख मांगें

1. चांदिवाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक हो

देशमुख ने मांग की है कि 1400 पन्नों की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए और उसे विधानमंडल के पटल पर रखा जाए। इससे जनता में यह विश्वास पैदा होगा कि सरकार न्यायिक आयोगों की रिपोर्ट को गंभीरता से लेती है।

2. एमपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा लिया जाए

देशमुख के अनुसार, एमपीएससी अध्यक्ष के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए न्यायिक जांच शुरू होने से पहले अध्यक्ष का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।

3. जांच की समयसीमा तय हो

एमपीएससी मामले की प्रस्तावित न्यायिक जांच के लिए 2 से 3 महीने की निश्चित समयसीमा तय की जाए। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट बिना किसी दबाव के तत्काल सार्वजनिक की जाए।

4. पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई जारी रहे

न्यायिक जांच शुरू होने के कारण पेपरलीक के आरोपियों और मुख्य सूत्रधारों के खिलाफ चल रही पुलिस या एसआईटी की कार्रवाई धीमी नहीं होनी चाहिए। देशमुख ने कहा कि न्यायिक जांच और आपराधिक कार्रवाई दोनों समानांतर रूप से चलनी चाहिए।


Created On :   7 Oct 2026 4:50 PM IST

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