Nagpur News: चंद्रयान-4 में चंद्रमा से मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाने की तैयारी

चंद्रयान-4 में चंद्रमा से मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाने की तैयारी
  • चंद्रयान-5 लुपेक्स में दक्षिणी ध्रुव के रहस्यों की होगी निगरानी
  • नए दौर में प्रवेश कर चुका है भारत का अंतरिक्ष अभियान

Nagpur News भारत का अंतरिक्ष अभियान अब शुरुआती प्रयोगों से आगे बढ़कर चंद्रमा और अन्य ग्रहों की गहराई से खोज के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। चंद्रयान-1 से चंद्रयान-3 तक की उपलब्धियों के बाद अब भारत चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने और उसके दक्षिणी ध्रुव के स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों में पानी व अन्य वाष्पशील पदार्थों की खोज की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह जानकारी राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) इसरो हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने दी। वे सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) नागपुर में आयोजित 85वें सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने ‘भारतीय चंद्र अभियानों के साथ पृथ्वी के चंद्रमा की खोज’ विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में सीएसआईआर-नीरी के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन उपस्थित थे।

थुंबा से चंद्रमा तक पहुंचा भारत का सफर : डॉ. चौहान ने बताया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की यात्रा 1963 में शुरु हुई थी। तब से थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन से लेकर स्वदेशी प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों, अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे और ग्रहों के अभियानों तक विस्तार विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता लगातार मजबूत की है। अब सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों और स्टार्ट-अप की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है।

चंद्रयान-4 में सबसे बड़ी चुनौती नमूने सुरक्षित लाना : डॉ. चौहान ने चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 अभियानों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने प्रस्तावित चंद्रयान-4 मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य चंद्रमा से नमूने एकत्र कर उन्हें सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर वापस लाना है। नमूनों को चंद्र सतह से एकत्र करने, संरक्षित रखने, पृथ्वी तक पहुंचाने और सुरक्षित रूप से प्राप्त करने की प्रक्रिया अपने आप में बड़ी तकनीकी चुनौती होगी।

लुपेक्स में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर फोकस : उन्होंने चंद्रयान-5 लुपेक्स मिशन की जानकारी दी। यह इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए का संयुक्त अभियान है। इसका फोकस चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र का अध्ययन करना है। खासतौर पर स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों में पानी और अन्य वाष्पशील पदार्थों की मौजूदगी को समझने की कोशिश की जाएगी। डॉ. चौहान ने कहा कि चंद्रमा की उत्पत्ति, विकास, सतह और वहां मौजूद संसाधनों से जुड़े कई रहस्य अभी सुलझने बाकी हैं। भविष्य के चंद्र अभियान इन रहस्यों को समझने के साथ भारत की अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।

नीरी ने पर्यावरण क्षेत्र में गिनाईं उपलब्धियांस्वागत भाषण में डॉ. एस. वेंकट मोहन ने ज्ञान आधारित और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण में सीएसआईआर के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल, वायु गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन और कार्बन सर्कुलैरिटी जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों पर नीरी के काम की जानकारी दी। समारोह में सीएसआईआर-नीरी न्यूजलेटर तथा भारत में जलवायु-जनित आर्थिक एवं गैर-आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र क्षति एवं नुकसान की रिपोर्टिंग के लिए रोडमैप विषयक नीति संक्षेप का विमोचन किया गया। 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर नीरी को आम जनता के लिए भी खोला गया। नागपुर और आसपास के 20 स्कूलों एवं कॉलेजों के करीब 1,000 विद्यार्थियों ने संस्थान का भ्रमण किया।


Created On :   2 Oct 2026 4:25 PM IST

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