Nagpur News: मरीजों की सुरक्षा को संस्थागत संस्कृति बनाने की आवश्यकता

मरीजों की सुरक्षा को संस्थागत संस्कृति बनाने की आवश्यकता
राष्ट्रीय पेशेंट सेफ्टी कॉन्फ्रेंस में नियोनेटोलॉजी टीम गौरवान्वित

Nagpur News स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्ता सुधार तथा साक्ष्य आधारित चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों की निरंतर आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य सेवाओं में संभावित जोखिमों की पहचान करना, क्लिनिकल अनुभवों से सीखना और उपचार की गुणवत्ता में लगातार सुधार करना जरूरी है। एम्स नागपुर में क्लिनिकल रिसर्च, नवाचार और शोध के निष्कर्षों को व्यवहारिक चिकित्सा व्यवस्था में लागू करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसा एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत पी. जोशी ने पुरस्कार हासिल करने वाले चिकित्सकों और नियोनेटोलॉजी विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एम्स नागपुर के लिए गर्व का विषय है।

चिकित्सा व्यवस्था में लगातार सुधार को लेकर प्रस्तुतियां : मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और चिकित्सा व्यवस्था में लगातार सुधार को लेकर आयोजित नेशनल पेशेंट सेफ्टी कॉन्फ्रेंस-2026 में एम्स नागपुर के नियोनेटोलॉजी विभाग ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए तीन पुरस्कार अपने नाम किए। देशभर के मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों से पहुंचे डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन की टीमों के बीच एम्स नागपुर के चिकित्सकों ने नवजात शिशुओं की देखभाल में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग, दूरस्थ क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और क्लिनिकल गवर्नेंस जैसे विषयों पर अपने शोध एवं नवाचार प्रस्तुत किए।

एंटीबायोटिक इस्तेमाल पर निगरानी को पहला पुरस्कार : कॉन्फ्रेंस में एम्स नागपुर की नियोनेटोलॉजी विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. मानसी मदान ने ओरल पेपर प्रेजेंटेशन में पहला पुरस्कार हासिल किया। उन्होंने ‘ ट्रैकिंग एंटिबायोटिक एक्सपोजर: एंटिमाइक्रोबाइल स्टीवर्डशिप डैशबोर्ड फ्रॉम ए टेरिटरी केयर एनआईसीयू’ विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इसमें नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल की निगरानी और उसके विश्लेषण पर जोर दिया गया। शोध का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर रूप से बीमार नवजातों को जरूरत के अनुसार ही एंटीबायोटिक दी जाए और अनावश्यक इस्तेमाल को कम किया जा सके। इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की चुनौती से निपटने में भी मदद मिल सकती है।

टेली-सपोर्ट से दूरदराज के नवजातों तक विशेषज्ञ देखभाल : नियोनेटोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशांत बनैत को ओरल पेपर प्रेजेंटेशन में तीसरा पुरस्कार मिला। उन्होंने ‘लिवरेंजिंग एन एडवांस्ड टेली-एसएनसीयू हब एंड स्पोक एंड स्पोक मॉडल टू इम्प्रूव एंड सस्टेन न्यूयोनेटल आउटकम्स इन रिमोट एरियास’ विषय पर प्रस्तुति दी। इसमें तकनीक और दूरस्थ चिकित्सा सहायता के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में नवजात शिशुओं की देखभाल को मजबूत करने की संभावनाओं को सामने रखा गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं।

वहीं, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अनुजा बेडेकर ने पोस्टर प्रेजेंटेशन में तीसरा पुरस्कार हासिल किया। उनका पोस्टर ‘क्लिनिकल गवर्नेंस फॉर ए सेफर नेशनल केयर’ विषय पर था। इसमें नवजात देखभाल में प्रक्रियाओं की निगरानी, जोखिमों की पहचान और उपचार व्यवस्था में लगातार सुधार के महत्व को रेखांकित किया गया।


Created On :   1 Oct 2026 3:23 PM IST

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