Nagpur News: गांधी की तस्वीर नहीं, विचारों का वास; चरखे पर सूत कातकर एकाग्रता सीखते बच्चे

शाश्वत कॉन्सेप्ट स्कूल में रटने के बजाय अनुभव से सीखने पर जोर

Nagpur News महात्मा गांधी की तस्वीर शायद स्कूल की दीवारों पर न मिले, लेकिन उनके विचार यहां बच्चों की दिनचर्या में नजर आते हैं। गांधी जयंती के अवसर पर अमरावती के शाश्वत कॉन्सेप्ट स्कूल का यह प्रयोग खास ध्यान खींचता है। यहां बच्चे चरखे पर सूत कातते हैं। यह गतिविधि केवल गांधीजी के चरखे से परिचय कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और श्रम के प्रति सम्मान विकसित करने का माध्यम भी है। गांधी को तस्वीर में नहीं, बल्कि जीवन और शिक्षा के व्यवहार में उतारने का यह अलग प्रयोग है।

अनुभव से सीखना : अतुल और अमृता गायगोले द्वारा संचालित शाश्वत में पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से अलग तरीके अपनाए गए हैं। यहां यूनिफॉर्म की अनिवार्यता नहीं है। रटकर सीखने के बजाय सवाल पूछने, निरीक्षण करने, प्रयोग करने और अनुभव से समझ विकसित करने पर जोर दिया जाता है। विद्यार्थी स्वयं भी एक-दूसरे को पढ़ाते हैं।

कैम्ब्रिज के साथ अनुभवाधारित शिक्षा : शाश्वत कॉन्सेप्ट स्कूल कैम्ब्रिज असेसमेंट इंटरनेशनल एज्युकेशन (सीएआईई) बोर्ड से संबद्ध है और यहां नर्सरी से 10वीं तक शिक्षा दी जाती है। स्कूल में कैम्ब्रिज पाठ्यक्रम के साथ अनुभवाधारित शिक्षण को जोड़ा गया है। विज्ञान, गणित, सामाजिक शास्त्र और साहित्य जैसे विषयों को प्रत्यक्ष अनुभवों से जोड़कर समझाने पर जोर दिया जाता है। यानी पाठ्यक्रम के विषय केवल किताबों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन और आसपास की परिस्थितियों से जोड़कर पढ़ाया जाता है।

गांधी और कृष्णमूर्ति के विचार : शाश्वत की शिक्षा-पद्धति पर महात्मा गांधी और जिद्दू कृष्णमूर्ति के विचारों का प्रभाव है। स्कूल के संचालक अतुल गायगोले ने अपनी बेटी के लिए स्कूल की तलाश शुरू की, लेकिन कोई स्कूल उन्हें पसंद नहीं आया। इसके बाद उन्होंने देश-विदेश की कई स्कूलों का अध्ययन किया। बाद में ऐसी शिक्षा-पद्धति विकसित की गई, जिसमें विद्यार्थियों को प्रयोग, चर्चा, निर्णय और प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से सीखने के अवसर मिलते हैं।

खेत, प्रकृति भी कक्षा : स्कूल में खेती, प्रकृति, पशु-पक्षियों की देखभाल, प्रयोगशाला और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई होती है। विद्यार्थियों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने और वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखने के अवसर भी दिए जाते हैं।

चरखे से एकाग्रता का अभ्यास : बच्चों के लिए चरखे पर सूत कातना केवल गांधीजी से जुड़ी गतिविधि नहीं है। चरखे पर सूत कातते समय हाथों की गति, धागे का तनाव और चरखे की चाल के बीच लगातार तालमेल रखना पड़ता है। इसकी प्रक्रिया में ध्यान और एकाग्रता की जरूरत होती है। इसी के माध्यम से बच्चों में धैर्य, एकाग्रता और श्रम के प्रति सम्मान विकसित करने का प्रयास किया जाता है। गांधी के विचारों को किसी दीवार पर टंगी तस्वीर तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बच्चों के अनुभवों और रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा बनाना शाश्वत की शिक्षा-पद्धति की खासियत है।


Created On :   2 Oct 2026 3:50 PM IST

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