बेटियां बोलेंगी और जमाना सुनेगा: जब नागपुर की बेटियों ने संभाला मंच तो सपनों ने भरी उड़ान, खुलकर सामने आईं ख्वाहिशें

जब नागपुर की बेटियों ने संभाला मंच तो सपनों ने भरी उड़ान, खुलकर सामने आईं ख्वाहिशें
  • किसी ने डॉक्टर तो किसी ने आईएएस, इंजीनियर, मॉडल और लेखक बनने का सपना सुनाया
  • किसी को भाषाएं सीखने का शौक, किसी ने किताबों को बनाया अपने भविष्य की प्रेरणा
  • विशेषज्ञों ने आत्मविश्वास, लक्ष्य और रिश्तों को लेकर बेटियों से किया खुला संवाद

डिजिटल डेस्क, नागपुर, मंच तैयार था, सामने दर्शक बैठे थे और फिर बारी-बारी से बेटियों ने माइक संभाला। किसी ने कहा डॉक्टर बनना है, किसी ने आईएएस बनने की बात कही तो किसी की मंजिल इंजीनियर, फैशन डिजाइनर, मॉडल, एक्टर या लेखक बनना है। किसी ने अलग-अलग भाषाएं सीखने का सपना सुनाया तो किसी ने किताबों को अपने भविष्य की प्रेरणा बताया। मौका था इंटरनेशनल डॉटर्स डे पर रवि भवन में आयोजित ‘डॉटर्स ड्रीम्स’ का और माहौल ऐसा था कि बेटियों के सपने सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स तक पहुंचे।

ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड राइटर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम की थीम थी—‘सिर्फ बेटियां बोलेंगी और जमाना सुनेगा’। खास बात यह रही कि इस बार बेटियों को भाषण सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपनी कहानी और अपना सपना सुनाने के लिए मंच दिया गया। उन्होंने अपनी हॉबीज, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को बेझिझक साझा किया।


इवेंट डायरेक्टर तोशी मोटवानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए मेहनत और संस्कारों के महत्व पर बात की। वंशिका जेठानी ने ‘बेटियां अपनी होती हैं, इसे पराया न समझें’ कविता प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। आर्टिस्ट एवं राइटर भूमिजा अग्रवाल ने किताबों से अपने लगाव और लेखिका बनने के सफर को साझा किया। तनिशा सहस्त्रबुद्धे ने विभिन्न भाषाएं सीखने की रुचि बताई।

डॉ. लक्ष्मी महाजन ने बताया कि बचपन में खराब स्वास्थ्य के कारण उनके पिता ने उन्हें मेहनत वाले कामों के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी थी। यही सलाह आगे चलकर उनके डॉक्टर बनने की राह बनी।

मधुरा गलगलीकर, खुशबू राठी, श्रुति गजभिये, गौरल शर्मा, युक्ता परसोड़कर, अविका अग्रवाल, आरोही तपासे, ओवी तापसे, ओमनी गुप्ता और साक्षी परिहार ने भी अपने सपने साझा किए।

डॉ. रश्मि बंसल ने आत्मविश्वास को गुब्बारे के भीतर की गैस से जोड़ते हुए कहा कि व्यक्ति को ऊंचाई तक पहुंचाने वाली ताकत उसके भीतर की ऊर्जा और आत्मविश्वास है। ईशा अरोरा ने पारिवारिक रिश्तों और व्यवहार पर संवाद किया। विशेष अतिथि अतुल अग्रवाल ने बेटियों को सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।

एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि ‘डॉटर्स ड्रीम्स’ का उद्देश्य बेटियों को अपनी भावनाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का मंच देना है। कार्यक्रम का संचालन प्रा. सौरभ सिंह ने किया। प्रा. सूरज तेलंग ने आभार माना और दीपशिखा अग्रवाल ने प्रबंधन संभाला। समापन पर बेटियों को उपहार और ग्रीटिंग कार्ड देकर अभिनंदन किया गया।

Created On :   1 Oct 2026 10:16 PM IST

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