New Delhi News: डॉ. भागवत ने कहा - संस्कृत भारत का प्राण और वैश्विक धरोहर, भारत को समझने के लिए इसे समझना अनिवार्य

डॉ. भागवत ने कहा - संस्कृत भारत का प्राण और वैश्विक धरोहर, भारत को समझने के लिए इसे समझना अनिवार्य
  • भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य
  • संस्कृत भारत का प्राण और वैश्विक धरोहरः डॉ. भागवत

New Delhi News. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक डॉ मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और जीवन दृष्टि की आधारशिला है। उन्होंने संस्कृत भाषा को सीखने पर जोर देते हुए कहा कि भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य है, क्योंकि इसी में हमारी ज्ञान-परंपरा, दर्शन और जीवन-मूल्य निहित हैं। यह हमारे विचारों, संस्कृति और ज्ञान का वह सार है जिसे पूरी दुनिया को देने की आवश्यकता है।

भागवत ने यहां दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित संस्कृत भारती के कार्यालय ‘प्रणव’ का लोकार्पण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी है और इसके माध्यम से अन्य भाषाओं को भी सहजता से सीखा जा सकता है। संस्कृत में निहित ज्ञान-विज्ञान का व्यापक भंडार संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी है।

भागवत ने संस्कृत सीखने के संदर्भ में “संभाषण पद्धति” को सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को व्यवहार में लाकर, बोलचाल के माध्यम से आसानी से सीखा जा सकता है। यदि हम संस्कृत को फिर से गौरव दिलाना चाहते हैं, तो इसे लोकभाषा बनाना होगा।

संस्कृत अतीत ही नहीं, भविष्य की भी भाषाः मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ‘प्रणव’ कार्यालय का लोकार्पण अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी प्राचीन एवं समृद्ध विरासत की संवाहिका है, जिसमें निहित ज्ञान-विज्ञान और दर्शन मानवता की अमूल्य धरोहर हैं। नई शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिली है।

Created On :   20 April 2026 8:28 PM IST

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