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यूके से फोन: रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 37 लाख की साइबर ठगी, वित्त मंत्री और बड़े उद्योगपतियों के नाम पर बुना जाल

Nagpur News. साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, उद्योगपति मुकेश अंबानी और इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के नाम और तस्वीरों का सहारा लेकर 37 लाख 5 हजार रुपए का चूना लगा दिया। पीड़ित की शिकायत पर नागपुर साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यू-ट्यूब वीडियो से शुरू हुआ खेल
पुलिस के अनुसार पीड़ित सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने मार्च महीने में यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखा था। वीडियो में देश के बड़े उद्योगपतियों और वित्त मंत्री के बयानों व नामों का दुरुपयोग कर एक विदेशी निवेश योजना का प्रचार किया जा रहा था, जिसमें डॉलर में भारी मुनाफे का दावा था। वीडियो में नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित के सामने ‘सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय निवेश’ और ‘हाई रिटर्न फंड’ जैसी आकर्षक स्कीम्स की जानकारी आई। इसके बाद ‘स्पोहा कंपनी’ नाम की एक फर्जी वेबसाइट खुली, जहां शिकायतकर्ता से उनकी निजी जानकारी भरवा ली गई।
यूके से आया फोन
जानकारी भरने के कुछ ही देर बाद पीड़ित को यूनाइटेड किंगडम (यूके) के अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन आए। फोन करने वालों ने अपना नाम राहुल मिश्रा और कबीर सिंह बताया। उन्होंने पीड़ित को झांसे में लेने के लिए शुरुआत में सिर्फ 200 डॉलर निवेश करने की सलाह दी। अधिकारी ने भरोसा करके पहली बार 20 हजार 700 रुपए निवेश किए। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए साइबर अपराधियों ने शुरुआत में निवेश की गई रकम पर थोड़ा सा मुनाफा जोड़कर वापस भेज दिया। इससे अधिकारी को स्कीम असली होने का भरोसा हो गया।
फंड मैनेजर बनकर ऐंठ ली रकम
इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को लगातार फोन करना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि, यह योजना सरकारी स्तर पर पूरी तरह मान्य है और मुकेश अंबानी व नारायण मूर्ति जैसे बड़े उद्योगपति भी इसी फंड में पैसा लगा रहे हैं। खुद को फंड मैनेजर बताने वाले इन ठगों ने अधिकारी को आरटीजीएस और क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने को कहा। कुछ ही दिनों में करोड़ों का मुनाफा कमाने के लालच में आकर रिटायर्ड अधिकारी धीरे-धीरे ठगों के जाल में फंसते चले गए और उन्होंने कुल 37 लाख 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
1 करोड़ का बैलेंस दिखा, पैसे मांगे तो खुली पोल
कुछ समय बाद ठगों ने पीड़ित के फर्जी प्रोफाइल डैशबोर्ड पर दिखाया कि, उनके निवेश की रकम बढ़कर 1 करोड़ रुपए हो चुकी है। यह देख जब अधिकारी ने अपनी रकम निकालने की मांग की, तो उन्हें 25 लाख रुपए और जमा करने के लिए कहा गया। इतनी बड़ी रकम दोबारा मांगने पर अधिकारी को अहसास हुआ कि, वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस स्टेशन पहुंचकर मामले की शिकायत की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट, अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर पूरा जाल बिछाया था। पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Created On :   21 May 2026 9:19 PM IST












