New Delhi News: स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा - प्रशासन और जीवन में भगवद्गीता ही सर्वोत्तम प्रबंधन शास्त्र

New Delhi News. भगवद्गीता केवल एक आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की हर समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजने वाला शास्त्र है। प्रशासन और लोकसेवा करते समय यदि गीता के कर्मयोग के सिद्धांत को अपनाया जाए, तो कार्यक्षमता और अधिक बढ़ती है। उक्त बातें 'जियो गीता' के प्रणेता महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने यहां राष्ट्रीय राजधानी के कॉपरनिकस मार्ग स्थित महाराष्ट्र सदन में 'प्रशासन में श्रीमद्भगवद्गीता की भूमिका' विषय पर आयोजित विशेष प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
महाराष्ट्र सदन की सचिव तथा स्थानिक आयुक्त आर. विमला की पहल पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए आर. विमला ने कहा कि भागदौड़ भरे प्रशासनिक जीवन में मानसिक शांति और कार्य के प्रति समर्पण निर्माण करने में आध्यात्मिक विचारों से बड़ी मदद मिलती है। अपने संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि मानव जीवन की असली समस्या परिस्थिति नहीं बल्कि मनुष्य के विचार हैं। गीता का 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' मंत्र यही सिखाता है कि फल की चिंता किए बिना जब हम अपना पूरा ध्यान कर्तव्य पर केंद्रित करते हैं, तो परिणाम अपने आप ही उत्तम आता है।
Created On :   2 March 2026 9:02 PM IST











