दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति ने कहा - भारतीय भाषाओं को एक मोतियों की माला में पिरोता है संस्कृत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संस्कृत वह स्वर्ण सूत्र है, जो भारत की अनेक भाषाओं को एक भव्य मोतियों की माला में पिरोता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन ज्ञान को सहेजना, पढ़ना, समझना और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध कराना बहुत आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति मंगलवार को यहां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को "नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करने" की शपथ भी दिलाई और मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया।
इस विश्वविद्यालय की एक संस्कृत विद्यापीठ से केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि अब समय आ गया है कि यह संस्था स्वयं को संस्कृत अध्ययन के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करे और अपने संस्थापक, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के सपने को साकार करे।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि शास्त्री जी का अमर आह्वान “जय जवान, जय किसान” केवल एक नारा नहीं था, बल्कि यह हमारी सीमाओं की रक्षा करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
Created On :   6 Oct 2026 6:28 PM IST













