MP News: फॉर्म-6 बदलाव पर सियासत तेज, सिसोदिया ने CEC ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना

फॉर्म-6 बदलाव पर सियासत तेज, सिसोदिया ने CEC ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में आयोग के दावे पर सवाल खड़े हुए हैं।

पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने फॉर्म-6 के किसी बदले हुए प्रारूप को मंजूरी नहीं दी थी। सिसोदिया ने इसी आधार पर चुनाव आयोग से सवाल किया कि आखिर फॉर्म-6 में बदलाव किस आधार पर किए गए।

सिसोदिया बोले- किसकी अनुमति से बदला फॉर्म-6?

सिसोदिया ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अपनी तरफ से बदलाव किए। उनके मुताबिक, इसके लिए न तो सुप्रीम कोर्ट की अनुमति ली गई और न ही दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति प्राप्त की गई।

AAP नेता ने दावा किया कि चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट में फॉर्म-6 में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से जोड़कर बताया गया था। अब अदालत में हुई टिप्पणी के बाद इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 कोई सामान्य दस्तावेज नहीं है, बल्कि नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसमें किए गए किसी भी बदलाव का सीधा असर मतदाताओं के पंजीकरण पर पड़ सकता है।

'वोट के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश'

सिसोदिया ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 की प्रक्रिया में बदलाव के जरिए लोगों के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि अगर नए मतदाताओं के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाना मुश्किल होता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उनके इस्तीफे की भी मांग की। सिसोदिया ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है और उन पर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

सौरभ भारद्वाज ने भी EC पर उठाए सवाल

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी फॉर्म-6 के मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने दावा किया कि आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी अपने प्रेस नोट में फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़कर पेश किया था।

भारद्वाज के मुताबिक, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐसा कोई आदेश देने से इनकार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अदालत ने फॉर्म-6 में बदलाव की अनुमति नहीं दी थी, तो चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में इसे अदालत के आदेश से क्यों जोड़ा। हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का विस्तृत पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।

CEC के खिलाफ अवमानना की मांग

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट के नाम का इस्तेमाल ऐसे दावे के लिए किया गया है जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया, तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की।

भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि फॉर्म-6 में बदलाव से ऐसे लोग प्रभावित हो सकते हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और जो दोबारा अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।

फॉर्म-6 को लेकर बढ़ी सियासी तकरार

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। AAP नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के आधार पर आयोग से जवाब मांगा है। अब इस विवाद में चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का आधिकारिक रिकॉर्ड अहम होगा।

Created On :   6 Oct 2026 1:30 AM IST

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