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माँ की मौत के बाद क्लेम के लिए बीमा कंपनी के चक्कर लगा रहा बेटा

माँ की मौत के बाद क्लेम के लिए बीमा कंपनी के चक्कर लगा रहा बेटा

पीडि़तों ने कहा कि कैशलैस के नाम पर हम लोगों के साथ हो रहा धोखा
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य बीमा काम आएगा। यह उद्देश्य प्रत्येक परिवार का होता है, पर उस परिवार के ऊपर दु:खों का पहाड़ टूट जाए और फिर उसके बाद बीमा कंपनी क्लेम देने से इनकार कर दे तो उस परिवार की हालत क्या होगी, यह किसी से छुपा नहीं है। ऐसा ही वर्तमान में बीमा कंपनी अपने पॉलिसी धारकों के साथ कर रही है। बीमा धारकों का आरोप है कि बीमा कंपनी हम लोगों से अस्पताल व दवाओं के बिल तो ले रही है, पर जब क्लेम भुगतान की बात आती है तो वे पीछे हट जाते हैं। ऐसी शिकायतें लगातार आ रही हैं और पीडि़त अपने तथ्यों के साथ बीमा कंपनी की पोल खोल रहे हैं।
इन नंबरों पर बीमा से संबंधित समस्या बताएँ
 इस तरह की समस्या यदि आपके साथ भी है तो आप दैनिक भास्कर, जबलपुर के मोबाइल नंबर - 9425324184, 9425357204 पर बात करके प्रमाण सहित अपनी बात रख सकते हैं। संकट की इस घड़ी में भास्कर द्वारा आपकी आवाज को खबर के माध्यम से उचित मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। 
पाँच माह पहले हुई थी माँ की मौत
अधारताल न्यू राम नगर निवासी दीपक राय ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी माँ श्रीमती कृष्णा राय 2 दिसम्बर 2020 को कोरोना संक्रमण की शिकार हो गईं थीं। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। माँ का स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से बीमा था। निजी अस्पताल के द्वारा इलाज शुरू कर दिया गया और दो दिनों बाद कैशलैस करने का वादा किया था पर बाद में अस्पताल प्रबंधन ने नकद रुपए जमा करने के लिए कहा। माँ को स्वस्थ करने के लिए हम लोगों ने पूरा कैश अस्पताल में जमा करना शुरू कर दिया था। इलाज के दौरान 21 दिसम्बर को माँ कृष्णा बाई का निधन हो गया। माँ के निधन के बाद अस्पताल व दवाओं के बिल हमने इंश्योरेंस कंपनी में लगाए थे पर पाँच माह बीत जाने के बाद भी बीमा कंपनी के द्वारा बिलों का भुगतान नहीं किया गया। लगातार ऑफिस में संपर्क कर रहे हैं पर किसी तरह की राहत वहाँ से नहीं दी जा रही है।
बिल के लिए लगाने पड़ रहे चक्कर
कोविड की शिकार होने के कारण करमेता निवासी निशांत ने बताया कि माँ श्रीमती जमुना विश्वकर्मा को 22 सितम्बर 2020 को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उनका 28 सितम्बर तक इलाज चला। अस्पताल का बिल 1 लाख 35 हजार हो गया था। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में जब अस्पताल व दवाइयों के बिल लगाए तो कंपनी ने अनेक तरह से परीक्षण किया और उसके बाद अस्पताल की अलग से रिपोर्ट माँगी। पीडि़त का कहना था कि हमारे द्वारा सारे दस्तावेज दिए गए, पर आज तक बिलों का भुगतान नहीं किया। कंपनी के टोल फ्री नंबर में बात की तथा उसके बाद स्थानीय कार्यालय में संपर्क किया, पर वहाँ से किसी तरह की राहत नहीं मिली। बेटे ने आरोप लगाया है कि इंश्योरेंस कंपनी प्रताडि़त कर रही है। अगर हमारा क्लेम कंपनी ने नहीं दिया तो हम उपभोक्ता फोरम में भी केस लगाएँगे। पीडि़त का कहना है कि अस्पताल का बिल हमारे द्वारा कर्ज लेकर चुकाया गया था।
इनका कहना है
90 से कम ऑक्सीजन तथा 102 से अधिक बुखार होने पर ही अस्पताल में मरीज को भर्ती करने का नियम है। अगर डॉक्टर भर्ती करने के कारणों का उल्लेख मरीज की रिपोर्ट में करता है तो हम कैशलैस कर देते हैं। पॉलिसी धारक सारी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा तो हम तुरंत भुगतान करते हैं।
कुलदीप मिश्रा, ब्रांच मैनेजर स्टार हेल्थ

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