comScore

स्वास्थ्य विभाग में ठेका देने में मनमानी - नेताओं ने के इशारे पर हो रहे काम

स्वास्थ्य विभाग में ठेका देने में मनमानी - नेताओं ने के इशारे पर हो रहे काम

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। स्वास्थ्य विभाग में हुई दो टेंडर प्रक्रिया इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। अधिकारियों पर आरोप है कि नियमों को ताक में रखकर अफसरों ने चहेतों को ठेका दे दिया। गाडिय़ां लगाने जहां नेताजी ने अफसरों पर भरपूर दबाव बनाया, वहीं अधिकारियों ने भी एक कदम आगे बढ़कर ऐसे केटर्स को ठेका दे दिया, जिसने खाने के दाम ही टेंडर में नहीं भरे थे। स्थानीय स्तर पर जब इन मामलों की शिकायतें हुई तो अधिकारियों ने नेताओं के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब न्याय के लिए आवेदक कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। वहीं वर्तमान में जो अधिकारी स्वास्थ्य विभाग में तैनात है वे दोनों ही मामलों में पुराने अफसरों का नाम लेकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इन दो मामलों में घिरे अफसर -खाने का दाम लिखा ही नहीं, उसके बाद दे दिया केटर्स को ठेका
जलपान और भोजन के लिए अक्टूबर में स्वास्थ्य विभाग ने टैंडर निकाला था। नियमों को मुताबिक कैटर्स को अलग-अलग खाद्य सामानों के दाम भरकर स्वास्थ्य विभाग के पास ऑनलाइन आवेदन करना था, तमाम प्रक्रिया हुई। जिसमें आधा दर्जन केटर्स ने ठेके के लिए अप्लाई किया। अधिकारियों ने परीक्षण के बाद अक्कू बाबर्ची केटर्स, सांई केटर्स और जेड केटर्स के तीन नाम फाइनल किए। दामों के आधार पर अधिकारियों ने ये ठेका अक्कू बाबर्ची केटर्स को दे दिया। जबकि जो खाद्य सामग्रियों की सूची सभी केटर्स ने टेंडर फार्म  में लगाई थी उसमें अक्कू केटर्स द्वारा सादा भोजन और स्पेशल भोजन के नाम के आगे अपने दाम ही नहीं लिखे थे। जबकि प्रशिक्षण के समय सबसे ज्यादा सप्लाई इन्हीं दो भोजन की होती है। अब आवेदकों की आपत्ति है कि जब केटर्स द्वारा भोजन के टेंडर में दोनो वेरायटी के दाम ही अंकित नहीं किए गए हैं तो किस आधार पर ये टेंडर दे दिया गया।
एक साल के लिए दिया जाना है ठेका
एक साल के लिए ये ठेका दिया स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिया जाना है। जिला अस्पताल में नर्सो सहित स्वास्थ्य अमले के लिए प्रशिक्षण के नाम पर हर साल लाखों रुपए का भोजन दिया जाता है। पिछले एक साल से इस टेंडर को लेकर स्वास्थ्य विभाग में मारामारी मची हुई थी।
मोविलिटी वाहन टेंडर में नेताजी की एंट्री, नियमों को ताक पर रख हो गया टेंडर
दूसरा मामला मोविलिटी वाहनों का है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॅाक्टरों सहित अधिकारियों के लिए 36 मोविलिटी वाहन लगाए जाने का टेंडर जारी किया गया था। शर्तें थी कि निविदाकार के पास कम से कम 6 वाहन स्वयं अथवा फर्म के नाम पर पंजीकृत होना चाहिए लेकिन जिस निधि साव के नाम ट्रेवल्स को टेंडर दिया गया। उसके नाम से सिर्फ  पांच वाहन ही दर्ज है। अब इस नियम को आधार बनाकर बाकी ट्रेवल्स संचालक हल्ला मचा रहे हैं। ट्रेवल्स संचालकों का कहना है कि जो नियमों में खरा उतर रहे हैं और जिनके रेट भी वाहनों के कम हैं उन्हें दरकिनार कर ऐसी ट्रेवल्स को ठेका दे दिया गया है जो नियमों में खरा ही नहीं उतरी है। हल्ला मचने के बाद मामला भोपाल के बाद न्यायालय तक पहुंच चुका है। जिसमें न्यायालय ने कलेक्टर, स्वास्थ्य अधिकारी सहित निधि साव ट्रेवल्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ये भी है आरोप
रेट में भी बड़ा अंतर:
 36 बोलेरों वाहनों के साथ-साथ जायलों और इनोवा वाहन के भी रेट मांगे गए थे। सबसे ज्यादा बोलेरो वाहन लगने हैं। बाकि दो वाहन कभी-कभार ही लगते हैं ऐसे में जिस ट्रेवल्स को काम दिया गया। जायलों के कम लेकिन बोलेरों वाहन के 1650 रुपए प्रति दिन रेट लगाए हैं जबकि बाकियों ने 1250 का रेट दिया है।
भोपाल से आया फोन और खोल दिया टेंडर:
1 अक्टूबर को देर शाम टेंडर खोले गए। टेंडर खोले जाने के समय सभी छह सदस्यों का होना आवश्यक था लेकिन प्रभारी सीएमओ ने बिना सदस्यों की उपस्थिति में टेंडर खोल लिए। भोपाल से आए फोन के आधार पर टेंडर तय कर लिए गए। टेंडर खोलते समय नियमों का पालन नहीं किया गया।
सीएमएचओं से सीधी बात...
- जब ये टेंडर प्रक्रिया हुई इस समय मैं सीएमएचओ के पद पर नहीं था पूर्व अधिकारियों ने दोनों ही टेंडर प्रक्रिया को पूरा करवाया।
- दोनों ही मामलों की शिकायतें फिलहाल मेरे पास नहीं आई है। जिस वजह से इस मामले में अभी तक जांच के आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
डॉ. शरद बंसोड़ सीएमएचओ, छिंदवाड़ा
 

कमेंट करें
RdbC7